Saudi Oil Pipeline Attacks: भारत की जेब पर डाका! कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका

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AuthorMehul Desai|Published at:
Saudi Oil Pipeline Attacks: भारत की जेब पर डाका! कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका

सऊदी अरब की ऊर्जा सुविधाओं पर हूती विद्रोहियों के ड्रोन हमलों और समुद्री मार्गों की नाकेबंदी ने ग्लोबल क्रूड सप्लाई को संकट में डाल दिया है। भारत के लिए, जो अपनी अधिकांश तेल जरूरतें आयात करता है, यह घटना फ्यूल की कीमतों और महंगाई के लिए एक बड़ा रिस्क है।

सऊदी अरब के 1,200 किलोमीटर लंबे ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के मुख्य पंप स्टेशनों को निशाना बनाए जाने के बाद ग्लोबल सप्लाई चेन पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले के बाद 4 से 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन की ढुलाई ठप हो गई है। स्थिति तब और बिगड़ गई जब बाब अल-मंडेब और होर्मुज के जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर भी ब्लॉकेज की खबरें सामने आईं।

भारत पर सीधा असर

भारत अपनी तेल खपत का एक बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करता है। ऐसे में यदि सऊदी सप्लाई में लंबे समय तक रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर Brent क्रूड के दामों पर पड़ेगा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें न केवल भारत के इंपोर्ट बिल को बढ़ाएंगी, बल्कि ट्रेड डेफिसिट भी चौड़ा हो सकता है।

OMCs और निवेशकों के लिए संकेत

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL), और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। अगर ग्लोबल लेवल पर दाम बढ़ते हैं और घरेलू स्तर पर फ्यूल की कीमतें तुरंत नहीं बदली जाती हैं, तो इन कंपनियों का मुनाफा प्रभावित होगा। इसके अलावा, ऊर्जा की बढ़ती लागत सीधे तौर पर रिटेल महंगाई को बढ़ावा देती है, जिसे लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) हमेशा सतर्क रहता है।

अभी बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि तेल उत्पादक देश इस नाकेबंदी को कैसे संभालते हैं। जहाजों के इंश्योरेंस प्रीमियम और शिपिंग कॉस्ट में बढ़ोतरी से यह तनाव और गहरा हो सकता है, जिससे आगामी हफ्तों में बाजार का सेंटीमेंट काफी वोलेटाइल रह सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.