यमन में जेल पर हुए हवाई हमले और उसके बाद के तनाव ने मध्य-पूर्व में हलचल मचा दी है। जवाबी कार्रवाई में Saudi Aramco की सुविधाओं पर हुए हमलों के बाद उत्पादन ठप होने की खबरें हैं, जो ग्लोबल एनर्जी सप्लाई के लिए बड़ा खतरा बन गया है। भारतीय निवेशकों के लिए कच्चा तेल महंगा होना महंगाई और कॉर्पोरेट मार्जिन पर सीधा असर डाल सकता है।
यमन के अल-जौफ प्रांत में एक डिटेंशन सेंटर पर हुए हमले में 23 लोगों की मौत के बाद स्थिति बेहद नाजुक हो गई है। हुथी विद्रोहियों ने इसके जवाब में सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्सों में ड्रोन और मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं। इस आक्रामक कार्रवाई की चपेट में Saudi Aramco की महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर आ गई है, जिसके चलते आभा और जिज़ान स्थित साइट्स पर ऑपरेशन्स को अस्थायी रूप से सस्पेंड करना पड़ा है।
पिछले 4 सालों से चला आ रहा अनौपचारिक युद्धविराम अब पूरी तरह खत्म होता दिख रहा है, जिसने क्षेत्रीय स्थिरता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में से एक, सऊदी अरब के प्रोडक्शन में किसी भी तरह की बाधा सीधे तौर पर इंटरनेशनल क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल ला सकती है।
भारतीय बाजारों के लिए जोखिम (Impact on Indian Markets)
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल के भाव में बढ़त का सीधा असर ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) और घरेलू महंगाई पर पड़ेगा। यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs), एविएशन और पेंट-केमिकल सेक्टर के प्रॉफिट मार्जिन पर तगड़ा दबाव देखने को मिल सकता है।
इसके अलावा, रेड सी और बाब अल-मंडप जलडमरूमध्य (Bab al-Mandeb Strait) में बढ़ती अस्थिरता शिपिंग इंश्योरेंस और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ा सकती है, जिससे भारत में आयातित वस्तुओं की कीमतें भी प्रभावित होंगी। फिलहाल निवेशकों की नजर इस बात पर है कि Aramco की सुविधाएं कब तक सामान्य होती हैं और क्या यह संघर्ष समुद्री व्यापार मार्गों को और कितना प्रभावित करता है।
