Saudi Aramco की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद भारत को कच्चे तेल की सप्लाई रोक दी गई है। इस बीच **$108** प्रति बैरल के ऊपर चल रही ब्रेंट क्रूड की कीमतों और अमेरिकी कानून के तहत रूस से आयात पर संभावित **100%** टैरिफ ने भारतीय रिफाइनर्स की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
सप्लाई चेन में बड़ी बाधा
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुए हमले ने तेल सप्लाई के मुख्य गलियारे को बाधित कर दिया है। इसका सीधा असर भारतीय रिफाइनर्स पर पड़ा है, जिन्हें अब महंगे स्पॉट मार्केट और कठिन शिपिंग रूटों का सहारा लेना पड़ रहा है। इस समय ब्रेंट क्रूड की कीमतें $108 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जो पहले से ही कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव
Indian Oil Corporation, BPCL, HPCL और Reliance Industries जैसे दिग्गज रिफाइनर्स के सामने अब लागत का बड़ा संकट है। तेल की सप्लाई प्रभावित होने और टैंकर रेट्स के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से कच्चे माल की लैंडिंग कॉस्ट में भारी उछाल आया है। चूंकि रिफाइनिंग बिजनेस का पूरा खेल इनपुट कॉस्ट पर टिका होता है, इसलिए यह स्थिति कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन को बुरी तरह निचोड़ सकती है।
अमेरिकी कानून का खतरा (Geopolitical Risk)
बाजार पर सिर्फ पाइपलाइन हमले का ही नहीं, बल्कि 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' का भी दबाव है। यदि अमेरिका रूस से ऊर्जा उत्पाद आयात करने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाता है, तो भारत को अपने सस्ते रूसी तेल के विकल्प खोजने पड़ेंगे। यह दोहरा दबाव भारतीय ऊर्जा कंपनियों के लिए बड़ा सरदर्द साबित हो सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?
निवेशकों को अब दो मुख्य बातों पर नजर रखनी चाहिए: पहली, सऊदी अरामको कितनी जल्दी पाइपलाइन की मरम्मत पूरी करता है, और दूसरी, अमेरिकी टैरिफ कानून पर भारत सरकार का रुख क्या रहता है। आने वाली तिमाहियों के नतीजे यह साफ कर देंगे कि इन चुनौतियों का असर कंपनियों के मुनाफे पर कितना गहरा पड़ा है।
