अधिग्रहण का रास्ता साफ, शेयर में उछाल
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने Sarda Energy and Minerals Ltd. की SKS Power को खरीदने की डील पर अंतिम फैसला सुनाया। कोर्ट ने अधिग्रहण से जुड़ी याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिससे Torrent Power और Jindal Power जैसे असफल बोलीदाताओं को झटका लगा। इस फैसले के बाद Sarda Energy के शेयर में 8% से अधिक की तेजी आई और यह इंट्राडे में ₹561 तक पहुंच गया। एनालिस्ट्स का मानना है कि SKS Power के अधिग्रहण से कंपनी के ऑपरेशंस में स्थिरता आएगी और बिजनेस साइक्लिकल पैटर्न का असर कम होगा। शेयर में यह उछाल इसी उम्मीद का नतीजा है, जो डील के लॉन्ग-टर्म फायदों पर फोकस कर रहा है।
नतीजों ने दिखाया अलग ही मंजर
बाजार की सकारात्मक प्रतिक्रिया के बावजूद, कंपनी के तीसरी तिमाही (Q3) के वित्तीय नतीजे कहानी का दूसरा पहलू दिखाते हैं। इस तिमाही में Sarda Energy का नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 3.55% गिरकर ₹190.4 करोड़ रहा। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) भी 3.3% घटकर ₹1,276 करोड़ पर आ गया। यह गिरावट कंपनी पर चल रहे ऑपरेटिंग प्रेशर को दिखाती है, न कि किसी एक घटना को।
मार्जिन में भारी गिरावट और वैल्यूएशन का खेल
नतीजों का सबसे चिंताजनक पहलू मार्जिन में आई भारी गिरावट है। इस तिमाही में कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन घटकर 24.36% रह गए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 27.95% थे। यानी 350 बेसिस पॉइंट्स से ज़्यादा की कमी आई है। EBITDA में भी 15.7% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹18,500 करोड़ है और इसका पीई रेशियो (P/E ratio) लगभग 12.5x है। वहीं, इंडस्ट्री के दूसरे बड़े प्लेयर्स जैसे Torrent Power का पीई 23x और JSW Power का 18x के आसपास है। यह दिखाता है कि Sarda Energy का वैल्यूएशन मौजूदा कमाई के बजाय भविष्य की उम्मीदों पर टिका है।
एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय
Sarda Energy को लेकर एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। जहां SKS Power डील के सफलतापूर्वक पूरा होने को लॉन्ग-टर्म के लिए पॉजिटिव माना जा रहा है, वहीं मौजूदा नतीजों में कमजोरी और मार्जिन पर दबाव को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। कुछ ब्रोकरेज हाउसेज ने ₹500 से ₹620 तक के टारगेट प्राइस दिए हैं और 'होल्ड' (Hold) रेटिंग की सलाह दी है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि कंपनी SKS Power के इंटीग्रेशन को कैसे मैनेज करती है और आने वाली तिमाहियों में प्रॉफिटेबिलिटी और मार्जिन में कैसे सुधार लाती है।