महाराष्ट्र के सांगली में स्थित **10-मेगावाट** क्षमता वाले Bhumi Green Energy प्लांट को प्रशासन ने सील कर दिया है। पर्यावरण और संचालन संबंधी कड़े नियमों का पालन न करने के कारण कंपनी पर यह बड़ी कार्रवाई हुई है, जो इस सेक्टर में निवेश के जोखिमों को उजागर करती है।
स्थानीय अधिकारियों ने 23 सितंबर 2026 को सांगली स्थित Bhumi Green Energy के प्लांट को बंद करने का आदेश जारी किया। मिराज के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट द्वारा लिया गया यह एक्शन कंपनी की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। जांच में सामने आया कि प्लांट 'सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016' के मानकों को पूरा करने में बुरी तरह विफल रहा है।
तकनीकी खामियां और बड़ा खतरा
जांच में सबसे चौंकाने वाली बात प्लांट की सेकेंडरी कंबशन चैंबर का तापमान रही। जहां सुरक्षित इंसीनिरेशन के लिए 950 डिग्री सेल्सियस तापमान जरूरी है, वहीं यह प्लांट महज 230 डिग्री सेल्सियस पर काम कर रहा था। कम तापमान पर कचरा जलाने से जहरीली गैसों (डायोक्सिन) के हवा में घुलने का खतरा बढ़ जाता है।
कम क्षमता और पर्यावरणीय लापरवाही
प्लांट की कार्यक्षमता (Capacity Utilization) केवल 33% थी, जिससे महीने में सिर्फ 2.38 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हो पा रहा था। इसके अलावा, प्लांट का एफ्लुएंट ट्रीटमेंट सिस्टम भी बंद पड़ा था, जिसके कारण बिना साफ हुआ गंदा पानी वारणा नदी (Warana River) में छोड़ा जा रहा था। साथ ही, कंपनी प्रदूषण संबंधी जरूरी डेटा भी सरकारी बोर्ड्स को नहीं भेज रही थी।
यह मामला केवल एक प्लांट तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट्स की व्यवहार्यता (Viability) पर सवाल खड़े करता है। निवेशकों के लिए यह एक स्पष्ट संकेत है कि ग्रीन एनर्जी सेक्टर में अब ऑपरेशनल एफिशिएंसी और स्ट्रिक्ट कंप्लायंस अनिवार्य हो गया है। सरकार अब कचरा प्रबंधन के लिए इंसिनरेशन मॉडल की जगह सस्टेनेबल और सोर्स-सेग्रीगेटेड सिस्टम पर जोर दे रही है, जिससे इस सेक्टर की कंपनियों पर आगे और भी कड़ी ऑडिट की तलवार लटकी रहेगी।
