सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें वे Adani Power द्वारा भेजे गए **₹1,005 करोड़** के इनवॉइस पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे। कोर्ट ने डिस्कॉम्स को **45 दिनों** के अंदर भुगतान करने का निर्देश दिया है, जबकि इलेक्ट्रिसिटी अपीलेट ट्रिब्यूनल (APTEL) अगले **तीन महीनों** में मामले का अंतिम निपटारा करेगा।
Adani Power के ₹1,005 करोड़ के बिल पर बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने सोमवार को कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) द्वारा Adani Power को ₹1,005 करोड़ के इनवॉइस के भुगतान को लेकर दायर की गई चुनौती को खारिज कर दिया है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अगुवाई वाली बेंच ने इस भुगतान विवाद में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिससे डिस्कॉम्स को 45 दिनों के भीतर बकाया राशि का भुगतान करना होगा।
विवाद की जड़ क्या है?
यह मामला सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (CERC) के 2023 के एक आदेश से उपजा है। CERC ने फैसला सुनाया था कि कर्नाटक डिस्कॉम्स पर डिफरेंशियल अमाउंट्स पर कैरिंग कॉस्ट्स और पिछली भुगतान देरी के कारण जमा हुए लेट पेमेंट सरचार्ज (LPS) का भुगतान करने की देनदारी बनती है। Adani Power इन बकायों की वसूली चाहता था, जबकि डिस्कॉम्स का तर्क था कि यह भुगतान उनके संचालन पर भारी वित्तीय बोझ डालेगा।
डिस्कॉम्स की दलील और कोर्ट का रुख
कर्नाटक डिस्कॉम्स ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था ताकि इन इनवॉइस को सरकारी पावर ट्रांजेक्शन पोर्टल पर अपलोड करने से रोका जा सके। उनका कहना था कि बिजली आपूर्ति में किसी भी बाधा से बचने के लिए उन्हें विरोध के तहत भुगतान करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। डिस्कॉम्स ने यह भी दलील दी कि CERC का मूल आदेश त्रुटिपूर्ण था और इलेक्ट्रिसिटी अपीलेट ट्रिब्यूनल (APTEL) को मामले पर नए सिरे से विचार करना चाहिए था।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार करने के बाद, मामला अब अंतिम निर्णय के अधीन है। कोर्ट ने APTEL को अगले तीन महीनों के भीतर कार्यवाही पूरी करने और अंतिम निर्णय जारी करने का निर्देश दिया है। जब तक यह समय सीमा पूरी नहीं हो जाती, तब तक भुगतान का वर्तमान आदेश लागू रहेगा।
निवेशकों के लिए मायने
यह फैसला Adani Power के लिए इस खास दावे के संबंध में तत्काल कैश फ्लो की स्पष्टता प्रदान करता है। हालांकि, पावर सेक्टर में जनरेटर और राज्य के स्वामित्व वाली वितरण कंपनियों के बीच भुगतान चक्र का व्यापक संदर्भ एक महत्वपूर्ण निगरानी बिंदु बना हुआ है। वितरण उपयोगिताओं की कार्यशील पूंजी और लिक्विडिटी का प्रबंधन करने की क्षमता, जो अक्सर उच्च कुल कर्ज और परिचालन अक्षमताओं से प्रभावित होती है, भुगतान में देरी का कारण बनती है, जिससे ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में घर्षण पैदा होता है।
सोमवार को Adani Power के शेयरों में मामूली हलचल देखी गई, जो इस अदालत अपडेट पर एक अलग प्रतिक्रिया के बजाय सामान्य सेक्टर के रुझानों को दर्शाती है। हितधारकों के लिए मुख्य निगरानी बिंदु APTEL से अंतिम फैसला रहेगा, जो इन कैरिंग कॉस्ट्स और लेट पेमेंट सरचार्ज की प्रयोज्यता पर अंतिम कानूनी राय प्रदान करेगा।
