रूस से क्रूड ऑयल की सप्लाई **6 हफ्ते** के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। साप्ताहिक कमाई **$2.75 बिलियन** तक पहुंच गई है, लेकिन डीजल एक्सपोर्ट पर बैन से रूसी राजस्व पर दबाव बना हुआ है। भारत के लिए यह लगातार सस्ता क्रूड मिलने का संकेत है।
सप्लाई में रिकॉर्ड तेजी
27 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में रूस का समुद्री क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट 3.71 मिलियन बैरल प्रति दिन के आंकड़े तक पहुंच गया, जो अगस्त की शुरुआत के बाद से सबसे ज्यादा है। कच्चे तेल की कुछ ग्रेड्स की कीमतों में मजबूती आने के कारण रूसी क्रूड का साप्ताहिक एक्सपोर्ट मूल्य $2.75 बिलियन दर्ज किया गया है। भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद शिपिंग चैनल्स में स्थिरता इस आंकड़े की मुख्य वजह है।
डीजल एक्सपोर्ट बैन का असर
एक तरफ जहां क्रूड की सप्लाई बढ़ी है, वहीं रूस में डीजल एक्सपोर्ट पर लगी पाबंदी से राजस्व पर असर पड़ रहा है। घरेलू स्तर पर ईंधन की कमी को पूरा करने के लिए रूस ने यह बैन लगाया है, जो अक्टूबर तक जारी रह सकता है। इसके चलते रिफाइंड प्रोडक्ट्स की शिपमेंट में रोजाना लगभग 5,00,000 बैरल की कमी की गई है।
भारतीय निवेशकों के लिए अहम क्यों?
भारत और चीन रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदार बने हुए हैं। भारतीय कंपनियों के लिए कम लागत पर क्रूड मिलना बेहद जरूरी है ताकि रिफाइनिंग मार्जिन को बरकरार रखा जा सके। Reliance Industries, Indian Oil Corporation, BPCL, और HPCL जैसे स्टॉक्स के लिए यह सप्लाई चेन की स्थिरता बहुत मायने रखती है।
आगे की चुनौतियां
रूस की रिफाइनिंग क्षमता में अगर कोई और व्यवधान आता है, तो ग्लोबल स्तर पर डीजल की सप्लाई तंग हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ईंधन की कीमतें प्रभावित होंगी। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि यह बैन कितने समय तक चलता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर भारतीय रिफाइनरियों की मुनाफे की स्थिति और लागत संरचना को बदल सकता है।
