दुनिया भर में तेल सप्लाई करने वाला रूस अब खुद पेट्रोल के लिए भारत पर निर्भर हो गया है। रिफाइनरियों पर लगातार ड्रोन हमलों के कारण रूस में ईंधन की भारी किल्लत हो गई है, जिसके चलते पहली बार Nayara Energy जैसी भारतीय कंपनियां वहां पेट्रोल भेज रही हैं।
संकट की जड़: ड्रोन हमले
रूस दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल प्रोड्यूसर माना जाता है, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों ने रूस के NORSI, Perm और Yaroslavl जैसे महत्वपूर्ण रिफाइनिंग सेंटर्स को बुरी तरह तबाह कर दिया है। इन हमलों के बाद रूस की क्रूड प्रोसेसिंग क्षमता घटकर घरेलू मांग के मुकाबले मात्र 70% रह गई है। इस कमी को पूरा करने के लिए रूस अब भारत, बेलारूस और कजाकिस्तान जैसे देशों से पेट्रोल मंगवाने को मजबूर है।
भारत और रूस का बदलता ट्रेड
आमतौर पर रूस भारत को कच्चा तेल बेचता है, लेकिन अब यह समीकरण उल्टा हो गया है। जून और जुलाई 2026 के डेटा के मुताबिक, भारत से 10 लाख बैरल से ज्यादा पेट्रोल रूस भेजा गया है। इसमें Nayara Energy का नाम प्रमुखता से सामने आया है, जिसमें रूसी दिग्गज कंपनी Rosneft की भी हिस्सेदारी है।
लॉजिस्टिक और ग्लोबल रिस्क
यह ट्रेड इतना आसान नहीं है। फ्यूल की सप्लाई के लिए 'शैडो टैंकर्स' (shadow tankers) और समंदर में शिप-टू-शिप ट्रांसफर का सहारा लिया जा रहा है। ये रास्ते मिस्र के तट और मेडिटेरेनियन से होकर गुजरते हैं, जो लॉजिस्टिक कॉस्ट को काफी बढ़ा देते हैं।
ग्लोबल मार्केट पर असर
आंतरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस ने पेट्रोल एक्सपोर्ट पर बैन को जनवरी 2027 तक और डीजल एक्सपोर्ट बैन को सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया है। इससे ग्लोबल मार्केट में ईंधन की उपलब्धता कम हो रही है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ सकता है। निवेशकों के लिए यह एक बड़ा संकेत है कि ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन में अस्थिरता का दौर अभी और लंबा खिंच सकता है।
