ड्रोन हमलों के कारण रूस की रिफाइनरी क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस आपूर्ति संकट को देखते हुए, रूस अब घरेलू मांग को पूरा करने के लिए भारत समेत अन्य देशों से ईंधन का आयात कर रहा है, जो ग्लोबल एनर्जी मार्केट में एक बड़ा बदलाव है।
जंग और ऊर्जा संकट का गहरा नाता
रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष एक बेहद डरावने पड़ाव पर पहुंच गया है। यूके की डिफेंस इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी सेना में मौतों का आंकड़ा 5,00,000 के पार जा चुका है। 2022 से अब तक कुल हताहतों की संख्या करीब 15 लाख आंकी गई है। हालांकि युद्ध के मैदान में स्थिति थमी हुई है, लेकिन अब यह लड़ाई महत्वपूर्ण औद्योगिक और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने वाले एक हाई-स्टेक अभियान में बदल गई है।
रूसी रिफाइनिंग क्षमता पर असर
पिछले कुछ महीनों में, यूक्रेन ने लंबी दूरी के ड्रोन हमलों के जरिए रूसी तेल रिफाइनरियों को अपना मुख्य निशाना बनाया है। इन सटीक हमलों ने रिफाइनिंग ऑपरेशंस को बुरी तरह बाधित किया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, रूसी तेल उत्पादों का एक्सपोर्ट रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है, जिससे देश के भीतर आपूर्ति की भारी किल्लत पैदा हो गई है। पेट्रोल और डीजल का बड़ा निर्यातक रहा रूस अब खुद बाहरी बाजारों से ईंधन मंगाने की स्थिति में है। अगस्त 2026 के डेटा के अनुसार, रूस ने भारत, दक्षिण कोरिया और तुर्की से ईंधन आयात की गति तेज कर दी है।
ग्लोबल मार्केट पर असर
ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर इस तरह के हमले ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए बड़ा खतरा हैं। भारतीय ऊर्जा कंपनियों और ग्लोबल ट्रेडर्स के लिए यह एक जटिल स्थिति पैदा कर रहा है। हालांकि रूस को ईंधन भेजकर सप्लाई गैप भरा जा रहा है, लेकिन स्थिति अभी भी बहुत नाजुक है। अगर ड्रोन हमले और बढ़ते हैं, तो ग्लोबल स्तर पर तेल और फ्यूल की कीमतों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकता है। फिलहाल, मार्केट की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रूस अपनी रिफाइनिंग क्षमता को वापस पटरी पर ला पाएगा या आने वाले समय में ग्लोबल एनर्जी प्राइसेज में और अधिक सख्ती देखने को मिलेगी।
