रूस ने अब भारत से रिफाइंड फ्यूल (ईंधन) का आयात शुरू कर दिया है। अपनी घरेलू रिफाइनरियों में आई खराबी के कारण रूस को यह कदम उठाना पड़ा है। इस ट्रेड में मुख्य भूमिका Nayara Energy की Vadinar रिफाइनरी निभा रही है।
भारत और रूस के बीच एनर्जी ट्रेड ने एक नया मोड़ लिया है। अगस्त 2026 में रूस ने लगभग 1,72,000 टन ऑयल प्रोडक्ट्स का आयात किया, जिसमें से करीब 70% हिस्सा भारतीय रिफाइनरियों से आया है। रूस का यह कदम चौंकाने वाला है क्योंकि वह दुनिया के सबसे बड़े एनर्जी एक्सपोर्टर्स में गिना जाता है, लेकिन घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर में आई दिक्कतों के चलते उसे अब बाहर से ईंधन मंगाना पड़ रहा है।
कैसे काम कर रहा है यह मॉडल?
इस पूरे ट्रेड का केंद्र गुजरात स्थित Vadinar रिफाइनरी है, जिसे Nayara Energy ऑपरेट करती है। दिलचस्प बात यह है कि इस कंपनी में रूस की दिग्गज फर्म Rosneft की 49.13% हिस्सेदारी है। यह एक सर्कुलर प्रोसेस की तरह काम कर रहा है—रूस भारत को कच्चा तेल (Crude Oil) बेचता है, जिसे Vadinar रिफाइनरी में प्रोसेस किया जाता है और फिर तैयार गैसोलीन रूस के आर्कटिक पोर्ट्स को वापस भेजा जाता है।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Risk Factor)
भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के लिए यह भले ही व्यापार बढ़ाने का मौका हो, लेकिन जियो-पॉलिटिकल रिस्क कम नहीं है। सबसे बड़ी चिंता अमेरिकी नीतियों को लेकर है। अमेरिका की नई एडमिनिस्ट्रेशन एनर्जी ट्रेड पर कड़ी नजर रख रही है। अगर भविष्य में रूस के साथ इस तरह के ट्रेड पर अमेरिका कोई नए टैरिफ या प्रतिबंध लगाता है, तो भारतीय कंपनियों की मुसीबत बढ़ सकती है।
इसके अलावा, अभी भारतीय रिफाइनर्स को रूसी कच्चा तेल डिस्काउंट पर मिल रहा है, जिससे उनका प्रॉफिट मार्जिन काफी मजबूत बना हुआ है। यदि ग्लोबल पॉलिसीज के कारण भारत को महंगे सप्लायर्स की ओर रुख करना पड़ा, तो इन कंपनियों के मार्जिन्स पर सीधा असर पड़ सकता है। निवेशकों को आने वाले समय में अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी और टैरिफ से जुड़े अपडेट्स पर पैनी नजर रखने की सलाह दी जाती है।
