रशियन एंबेसडर Denis Alipov ने भारत द्वारा रूसी क्रूड ऑयल की खरीद को पूरी तरह से जायज ठहराया है। यह ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका रूस से ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है, जिससे भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर खतरा मंडरा रहा है।
रूस के एंबेसडर Denis Alipov ने साफ किया है कि भारत का रूसी क्रूड ऑयल खरीदना केवल अपनी राष्ट्रीय जरूरत और विकास के लिए है, न कि किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा। हालांकि, यह बयान ऐसे समय आया है जब वाशिंगटन में 'Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' पर विचार चल रहा है। अगर यह कानून लागू होता है, तो रूसी ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर 100% तक का भारी टैरिफ लगाया जा सकता है।
क्रूड सप्लाई में बदलाव
आंकड़ों पर नजर डालें तो अगस्त 2026 में भारत के रूसी क्रूड आयात में पिछले महीने के मुकाबले 26% की गिरावट आई है। इसके पीछे रिफाइनरी में मेंटेनेंस और चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसे कारण हैं। बावजूद इसके, रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है, जो भारत की कुल क्रूड जरूरतों का लगभग 45% हिस्सा पूरा करता है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
भारतीय निवेशकों की चिंता इस बात को लेकर है कि क्या ये भू-राजनीतिक तनाव तेल कंपनियों के मुनाफे पर असर डालेगा। अगर अमेरिका कड़े टैरिफ लगाता है, तो भारत को महंगे सोर्स से तेल खरीदना पड़ेगा। इससे Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी कंपनियों की लागत बढ़ेगी। यदि ये कंपनियां बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर नहीं डाल पाती हैं, तो इनके नेट प्रॉफिट पर सीधा असर पड़ेगा।
अगले कुछ महीनों में निवेशकों को अमेरिकी विधायी गतिविधियों और क्रूड इंपोर्ट डेटा पर बारीक नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि यही फैक्टर्स इन कंपनियों के स्टॉक परफॉर्मेंस को तय करेंगे।
