भारत ने 2047 तक **100 GW** न्यूक्लियर क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जो मौजूदा **10 GW** से काफी ज्यादा है। दिग्गज कंपनी Rosatom का मानना है कि प्रस्तावित SHANTI Act के तहत प्राइवेट प्लेयर्स को NPCIL के साथ जोड़ने से यह लक्ष्य मुमकिन है।
न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ा बदलाव
रशियन कंपनी Rosatom के एग्जीक्यूटिव किरील कोमारोव ने साफ किया है कि भारत का 100 GW का न्यूक्लियर विजन तभी हकीकत बन सकता है जब प्राइवेट सेक्टर को एंट्री मिले। फिलहाल न्यूक्लियर पावर का काम पूरी तरह से सरकार के अधीन है, लेकिन अब SHANTI Act पर काम चल रहा है, जो इस सेक्टर के दरवाजे प्राइवेट इंजीनियरिंग और इंफ्रा कंपनियों के लिए खोल सकता है।
क्यों है न्यूक्लियर एनर्जी जरूरी?
सोलर और विंड पावर मौसम पर निर्भर हैं, जबकि न्यूक्लियर एनर्जी 24/7 बेसलोड पावर की सप्लाई देती है। यह भारत की बढ़ती औद्योगिक जरूरतों के लिए ग्रिड स्टेबिलिटी के लिहाज से बेहद अहम है।
भारत और Rosatom की पार्टनरशिप
कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट इसका बेहतरीन उदाहरण है, जहां 50% प्रोजेक्ट कॉम्पोनेंट्स भारत में ही तैयार किए जा रहे हैं। यह लोकलाइजेशन निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इससे इंपोर्ट लागत कम होती है और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग चेन मजबूत होती है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को यह समझना चाहिए कि न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स में बहुत ज्यादा पूंजी की जरूरत होती है और इनमें बनने में सालों का समय लगता है। साथ ही, सेफ्टी और लैंड एक्विजिशन जैसे रेगुलेटरी हर्डल्स की वजह से लागत बढ़ने और काम में देरी का रिस्क हमेशा बना रहता है। फिलहाल, निवेशकों की नजरें SHANTI Act के कानून बनने और उसके बाद आने वाले टेंडर्स पर टिकी हैं।
