Reliance Share Price: Reliance और भारत सरकार के बीच ₹14,000 करोड़ के गैस विवाद का निपटारा संभव, सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Reliance Share Price: Reliance और भारत सरकार के बीच ₹14,000 करोड़ के गैस विवाद का निपटारा संभव, सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी
Overview

Reliance Industries को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने कंपनी को भारत सरकार के साथ कृष्णा-गोदावरी बेसिन में गैस माइग्रेशन विवाद को लेकर आपसी बातचीत से हल निकालने की इजाजत दे दी है। यह सालों पुराना मामला ₹1.7 अरब (लगभग ₹14,000 करोड़) का है।

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KG बेसिन विवाद का होगा डिप्लोमेटिक अंत?

सुप्रीम कोर्ट ने Reliance Industries Ltd (RIL) को भारतीय सरकार के साथ बातचीत के जरिए कृष्णा-गोदावरी (KG) D6 ब्लॉक से निकाले गए गैस को लेकर चल रहे एक दशक से अधिक पुराने कानूनी मामले को सुलझाने की अनुमति दे दी है। यह विवाद इस आरोप पर केंद्रित है कि RIL के कंसोर्टियम ने सरकारी कंपनी Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) के पड़ोसी ब्लॉक से गैस निकाली थी। सरकार ने इस मामले में लगभग $1.7 अरब (लगभग ₹14,000 करोड़) का दावा किया था, जबकि कुछ अनुमानों के अनुसार यह राशि $30 अरब तक पहुंच सकती है। यह फैसला मुकदमेबाजी से हटकर बातचीत से समाधान की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।

बाजार और वैल्यूएशन पर असर

भारत के Nifty 50 के प्रमुख खिलाड़ी RIL, जिसका मार्केट कैप लगभग ₹18.4 ट्रिलियन है, अपनी वैल्यूएशन को लेकर जांच के दायरे में है। कंपनी का वर्तमान P/E अनुपात लगभग 22.9 है, जो तेल और गैस सेक्टर के औसत 12.7 से काफी अधिक है। विश्लेषकों ने इस पर चिंता जताई है। यह गैस विवाद वैल्यूएशन संबंधी चिंताओं को और बढ़ाता है, जिससे RIL के लिए अपने एनर्जी बिजनेस को रिटेल, टेलीकॉम और न्यू एनर्जी जैसे क्षेत्रों में विस्तार के साथ संतुलित करना मुश्किल हो रहा है। इस विवाद का निपटारा लंबे समय से चली आ रही वित्तीय अनिश्चितता को खत्म कर सकता है।

रेगुलेटरी जोखिम और परिचालन पर पैनी नजर

आलोचक RIL के महत्वपूर्ण रेगुलेटरी एक्सपोजर और सरकारी संपत्तियों के साथ बार-बार होने वाले विवादों की ओर इशारा करते हैं। अन्य प्रतिस्पर्धियों के विपरीत, RIL के KG-D6 ऑपरेशंस में भारी पूंजी लगी है और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट से जुड़े विवाद भी सामने आए हैं। कंपनी ऐतिहासिक प्रोजेक्ट प्रदर्शन और इंसेंटिव योजनाओं पर भी जांच के दायरे में है। किसी भी सेटलमेंट में भारी भुगतान या रियायतें शामिल हो सकती हैं, जो अल्पावधि के मुनाफे को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन लंबी अवधि में रेगुलेटरी स्पष्टता प्रदान करेगी।

निवेशकों का नजरिया और भविष्य की योजनाएं

जुलाई में होने वाली सुनवाई से पहले, बाजार में इस मुकदमे के समाधान को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। ब्रोकरेज फर्म आम तौर पर RIL के रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल्स, रिटेल और डिजिटल सेवाओं में फैले एकीकृत बिजनेस मॉडल को देखते हुए इसके बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण रखती हैं। एक समझौता शासन (governance) और परिचालन निरंतरता के लिए सकारात्मक माना जाएगा, जिससे RIL अपनी नियोजित पूंजीगत व्यय योजनाओं, विशेष रूप से ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में, पर ध्यान केंद्रित कर सकेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.