Reliance Industries के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) बिजनेस ने Q1 में **17.2%** की जबरदस्त EBITDA ग्रोथ दर्ज की है। यह उछाल कच्चे तेल की सोर्सिंग में विविधता और एथेन के अनुकूल इकोनॉमिक्स से संभव हुआ है। कंपनी इस साल सोलर और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। हालांकि, रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद, मेंटेनेंस और घरेलू LPG आवंटन के चलते प्रोडक्शन वॉल्यूम **9.8%** गिर गया।
Reliance O2C की शानदार कमाई: EBITDA में 17.2% की उछाल
Reliance Industries ने ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) सेगमेंट के लिए जून 2026 को समाप्त तिमाही में 17.2% साल-दर-साल की मजबूत EBITDA ग्रोथ दर्ज की है, जो ₹17,010 करोड़ तक पहुंच गई। इसी अवधि में, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 54.1% की बढ़ोतरी के सहारे सेगमेंट के रेवेन्यू में भी 30.4% की प्रभावशाली वृद्धि हुई और यह ₹2,01,803 करोड़ पर पहुंच गया। यह वित्तीय प्रदर्शन कंपनी की रणनीतिक सोर्सिंग और ऑप्टिमाइज्ड प्रोडक्ट प्लेसमेंट के माध्यम से अस्थिर ऊर्जा बाजारों को सफलतापूर्वक नेविगेट करने की क्षमता को दर्शाता है।
ऑपरेशनल स्ट्रैटेजी और मार्केट में पकड़
कंपनी के O2C डिवीजन को कच्चे तेल की सोर्सिंग में लचीलेपन का फायदा मिला। रूस और लैटिन अमेरिका से अधिक खरीद ने अरेबियन गल्फ सप्लाई पर ऐतिहासिक निर्भरता को कम किया। सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका जैसे डेफिसिट बाजारों में रिफाइंड प्रोडक्ट्स बेचकर, Reliance ने अपने नेटबैक्स (परिवहन और विपणन लागत के बाद प्राप्त शुद्ध राजस्व) में सुधार किया। इसके अलावा, एथेन को फीडस्टॉक के रूप में उपयोग करने से पारंपरिक नैफ्था क्रैकर्स की तुलना में लागत लाभ मिला, जिसने पेट्रोकेमिकल बिजनेस में मार्जिन को सपोर्ट करने में मदद की।
प्रोडक्शन में गिरावट और बढ़ते खर्च
हालांकि, इस तिमाही में ऑपरेशनल चुनौतियां भी रहीं। कंपनी को बिक्री के लिए प्रोडक्शन में 9.8% की साल-दर-साल गिरावट का सामना करना पड़ा, जो कुल 15.6 मिलियन टन रहा। इस गिरावट का मुख्य कारण प्लान्ड मेंटेनेंस शटडाउन और प्रोपेन और ब्यूटेन को घरेलू लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) आउटपुट बढ़ाने के लिए डायवर्ट करने का रणनीतिक निर्णय था। इसके अलावा, प्रोडक्ट मार्जिन में स्थिरता के बावजूद, फिजिकल-क्रूड प्रीमियम, फ्रेट और इंश्योरेंस में बढ़ती लागतों और ईंधनों पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी के प्रभाव से लाभ आंशिक रूप से ऑफसेट हुआ।
रिन्यूएबल एनर्जी और ऑयल & गैस का भविष्य
पारंपरिक ईंधनों से परे, Reliance ग्रीन एनर्जी की ओर तेजी से बढ़ रही है। मैनेजमेंट ने Q1 अर्निंग्स कॉल के दौरान पुष्टि की कि कंपनी चालू फाइनेंशियल ईयर के भीतर 20 गीगावाट (GW) सोलर मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और 40 गीगावाट-घंटे (GWh) बैटरी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी तक पहुंचने की राह पर है। बैटरी प्रोडक्शन के लिए लॉन्ग-टर्म रोडमैप और भी महत्वाकांक्षी है, जिसका लक्ष्य कुल 120 GWh कैपेसिटी हासिल करना है।
अपस्ट्रीम ऑयल एंड गैस सेगमेंट में, EBITDA ₹4,973 करोड़ पर स्थिर रहा। KG-D6 ब्लॉक से प्रोडक्शन में होने वाली प्राकृतिक गिरावट को प्रबंधित करने के लिए, कंपनी कृष्णा-गोदावरी बेसिन में ड्रिलिंग गतिविधियों को तेज कर रही है। इस बीच, Jio-bp रिटेल नेटवर्क का विस्तार जारी है, जो 2,221 आउटलेट्स तक पहुंच गया है। पेट्रोल की बिक्री में 16.8% की स्वस्थ वॉल्यूम ग्रोथ देखी गई, जबकि डीजल वॉल्यूम में मामूली 1.9% की गिरावट आई। निवेशकों की निगाहें आने वाली तिमाहियों में कच्छ पावर सप्लाई प्रोजेक्ट के एग्जीक्यूशन टाइमलाइन और रिन्यूएबल एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं के स्थिर रैंप-अप पर बनी रहेंगी।
