Reliance Industries के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) सेगमेंट ने जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन करते हुए ₹17,010 करोड़ का रिकॉर्ड EBITDA दर्ज किया है। फ्यूल क्रैक्स और केमिकल मार्जिन्स में जबरदस्त उछाल ने इस ग्रोथ को लीड किया है। हालांकि, प्लांट में मेंटेनेंस और डोमेस्टिक रिटेल में कम रिकवरी के कारण प्रोडक्शन वॉल्यूम में गिरावट आई।
Reliance O2C की कमाई में रिकॉर्ड उछाल
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Limited) ने जून तिमाही के लिए अपने ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) बिजनेस के नतीजों का ऐलान किया है। इस सेगमेंट ने ₹17,010 करोड़ का EBITDA दर्ज किया है, जो पिछले 4 सालों में सबसे ज़्यादा है। यह आंकड़ा पिछली तिमाही के ₹14,520 करोड़ और पिछले साल की इसी तिमाही के ₹14,511 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है। इस तिमाही में सेगमेंट का EBITDA मार्जिन भी सुधरकर 8.4% हो गया, जो पिछली तिमाही में 7.9% था।
क्यों आई इतनी ज़बरदस्त कमाई?
इस शानदार प्रदर्शन का मुख्य कारण रिफाइंड प्रोडक्ट्स और पेट्रोकेमिकल्स के लिए अनुकूल बाज़ार की स्थितियां रहीं। क्रूड ऑयल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स के बीच प्रॉफिट मार्जिन (Transportation fuel cracks) में काफी बढ़ोतरी हुई, जिसमें मिडिल डिस्टिलेट क्रैक्स रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। इसके अलावा, एथेन (ethane) को नैफ्था (naphtha) के बजाय इस्तेमाल करने की लागत दक्षता और बेहतर प्रोडक्ट स्प्रेड्स ने डाउनस्ट्रीम केमिकल मार्जिन्स को भी बढ़ावा दिया। खास तौर पर, पॉलीएथिलीन (polyethylene) स्प्रेड्स में 79.1% और पॉलीप्रोपाइलीन (polypropylene) डेल्टा में 66.4% का सीक्वेंशियल उछाल देखा गया।
प्रोडक्शन में गिरावट और चुनौतियां
O2C सेगमेंट में भले ही शानदार तेजी देखी गई, लेकिन कंपनी को इस तिमाही में कुछ ऑपरेशनल चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। प्रोडक्शन वॉल्यूम साल-दर-साल 9.8% घटकर 15.6 मिलियन मीट्रिक टन रह गया। इसका मुख्य कारण क्रूड डिस्टिलेशन और कोकर यूनिट्स में शेड्यूल मेंटेनेंस था, जिसने उत्पादन को सीमित कर दिया। इसके अतिरिक्त, सरकार द्वारा ईंधन निर्यात (fuel exports) पर लगाए गए स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (Special Additional Excise Duty) और डोमेस्टिक फ्यूल रिटेलिंग पर मार्जिन प्रेशर का भी कंपनी के फाइनेंशियल परफॉरमेंस पर असर पड़ा।
फ्यूल रिटेल नेटवर्क का विस्तार
कंपनी के जियो-बीपी (Jio-bp) ब्रांड के तहत फ्यूल रिटेल नेटवर्क में विस्तार जारी रहा और आउटलेट्स की संख्या बढ़कर 2,221 हो गई। पेट्रोल सेल्स वॉल्यूम में साल-दर-साल 16.8% की हेल्दी बढ़ोतरी देखी गई, जबकि डीजल की मांग में मामूली 1.9% की गिरावट आई। ये रिटेल ट्रेंड्स घरेलू फ्यूल मार्केट में बदलते कंज्यूमर डिमांड और कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग को दर्शाते हैं।
आगे क्या?
कंपनी भविष्य में न्यू एनर्जी प्रोजेक्ट्स (New Energy projects) के फेज्ड कमीशनिंग और डिजिटल सर्विसेज यूनिट से वैल्यू अनलॉकिंग जैसे अपने बड़े स्ट्रेटेजिक लक्ष्यों पर फोकस कर रही है। इन्वेस्टर्स के लिए, आने वाले समय में ग्लोबल वोलेटिलिटी के बीच हाई फ्यूल क्रैक्स का बने रहना, एक्साइज ड्यूटी पर पॉलिसी के फैसले और नए एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा। मेंटेनेंस के बाद प्रोडक्शन बढ़ाने की क्षमता के साथ इन बेहतर मार्जिन्स को बनाए रखना, आने वाली तिमाहियों में सेगमेंट की सेहत का एक अहम संकेतक होगा।
