Reliance Industries (RIL) ने अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिसमें नेट प्रॉफिट में पिछले साल की तुलना में **22.4%** की गिरावट आई है। कंपनी का नेट प्रॉफिट घटकर **₹20,946 करोड़** रहा। ये गिरावट पिछले साल के एक बड़े एकमुश्त लाभ (one-time gain) के कारण है। हालांकि, कंपनी के रेवेन्यू ने **₹3.09 लाख करोड़** के रिकॉर्ड स्तर को छुआ है, जो पिछले साल की इसी अवधि से **27%** ज्यादा है।
क्यों गिरी मुनाफे की चाल?
Reliance Industries के लिए अप्रैल-जून 2027 की तिमाही (Q1FY27) मिली-जुली रही। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि के ₹26,994 करोड़ से घटकर ₹20,946 करोड़ रह गया। इस गिरावट की मुख्य वजह पिछले साल इसी तिमाही में ₹8,924 करोड़ के एकमुश्त लाभ का न होना है।
रेवेन्यू और ऑपरेशनल ग्रोथ
मुनाफे में गिरावट के बावजूद, RIL ने अपने रेवेन्यू में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी का कुल रेवेन्यू ₹3.09 लाख करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹2.44 लाख करोड़ से 27% ज्यादा है। यह अब तक की किसी भी तिमाही का सर्वाधिक रेवेन्यू है। ये ग्रोथ कंपनी के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) और डिजिटल सर्विसेज (Reliance Jio) जैसे अहम सेगमेंट्स में शानदार परफॉरमेंस के चलते संभव हुई है। पिछले तिमाही यानी मार्च 2026 में खत्म हुई तिमाही से भी रेवेन्यू में सुधार देखा गया है।
ऑपरेटिंग परफॉरमेंस की बात करें तो, EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) पिछले साल की तुलना में 6.8% घटकर ₹54,067 करोड़ रहा। हालांकि, पिछले तिमाही के मुकाबले इसमें 11.3% की बढ़त देखी गई। कंपनी का कोर EBITDA, जिसमें एकमुश्त आय को शामिल नहीं किया गया है, 10.7% बढ़कर ₹47,517 करोड़ रहा, जो मार्केट की उम्मीदों (₹46,650 करोड़) से बेहतर है। एकमुश्त आय को छोड़कर, टैक्स से पहले का प्रॉफिट 9.3% बढ़कर ₹24,080 करोड़ रहा।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
नतीजों के बाद, कई ब्रोकरेज फर्म्स ने Reliance Industries के स्टॉक पर पॉजिटिव आउटलुक बनाए रखा है। एनालिस्ट्स का मानना है कि Reliance Jio की डिजिटल सर्विसेज और O2C बिजनेस में रिकवरी की उम्मीदें स्टॉक के लिए पॉजिटिव रहेंगी। प्रॉफिट में गिरावट के बावजूद, कंपनी की फ्री कैश फ्लो जेनरेट करने की क्षमता निवेशकों के लिए एक अहम आकर्षण बनी हुई है। एनालिस्ट्स कंपनी की वैल्यूएशन को उसके डिजिटल और रिटेल सेक्टर्स में भविष्य की ग्रोथ के मुकाबले देख रहे हैं।
आगे निवेशकों को कोर EBITDA मार्जिन की स्थिरता, खासकर ग्लोबल एनर्जी प्राइसेस में उतार-चढ़ाव के बीच, और डिजिटल व रिटेल में कंपनी के निवेश पर नजर रखनी होगी। मैनेजमेंट की ओर से कैपिटल एलोकेशन प्लान्स पर कमेंट्री भी अहम होगी, जो कंपनी के कैश फ्लो और डेट मैनेजमेंट को प्रभावित कर सकती है। O2C सेगमेंट के रिफाइनिंग मार्जिन और नई डिजिटल सर्विसेज की अपनाने की दर (adoption rate) भी आने वाले महीनों में कंपनी की ऑपरेशनल स्ट्रेंथ को दर्शाएगी।
