Reliance Industries ने आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले में अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन (UCG) के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। यह **₹2.73 लाख करोड़** के उस मेगा प्लान का पहला हिस्सा है, जो अगले **30** वर्षों में सिंथेटिक गैस बनाने का लक्ष्य रखता है।
Reliance Industries Limited (RIL) ने एनर्जी सेक्टर में एक नई पहल करते हुए आंध्र प्रदेश में अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। कंपनी का लॉन्ग-टर्म विजन काफी बड़ा है, जिसमें 30 वर्षों में करीब ₹2.73 लाख करोड़ का निवेश करने की योजना है। हालांकि, अभी कंपनी ने सिर्फ पायलट प्रोजेक्ट पर फोकस किया है, जिस पर ₹3,000 करोड़ का खर्च आएगा। यह काम 2026 की तीसरी तिमाही से 2027 के अंत तक चलेगा।
नई टेक्नोलॉजी का दांव
अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन एक ऐसी प्रोसेस है जिसमें कोयले को जमीन से बाहर निकाले बिना, वहीं गहराई में सिंथेटिक गैस (Syngas) में बदल दिया जाता है। यह प्रोजेक्ट एलुरु जिले में 600 मीटर से ज्यादा गहरे 'चिंतालापुडी' और 'रेचेरला' कोल ब्लॉक्स पर आधारित है, जिसे रिलायंस ने अप्रैल 2026 की नीलामी में हासिल किया था। इस गैस का इस्तेमाल हाइड्रोजन, मेथनॉल, यूरिया और अमोनिया जैसे रसायनों के उत्पादन में कच्चा माल (Feedstock) के तौर पर किया जाएगा।
निवेश का फेज़-वाइज स्ट्रक्चर
निवेशकों को यह समझना होगा कि ₹2.73 लाख करोड़ का निवेश एक लॉन्ग-टर्म प्रस्ताव है, न कि कोई फौरी प्रतिबद्धता। मौजूदा निवेश सिर्फ टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग के लिए है। अगर पायलट प्रोजेक्ट तकनीकी और कमर्शियल तौर पर सफल होता है, तभी कंपनी भविष्य में बड़े निवेश पर फैसला लेगी।
जोखिम और चुनौतियां
भारत में बड़े पैमाने पर UCG टेक्नोलॉजी अभी नई है, इसलिए इसके सफल क्रियान्वयन और भौगोलिक परिस्थितियों का आकलन करना एक बड़ी चुनौती है। यदि पायलट प्रोजेक्ट उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं देता है, तो रिलायंस के पास अपना एक्सपोजर सीमित करने और प्लान रोकने का विकल्प भी खुला है। शेयरधारकों को अब कंपनी की ओर से आने वाले पायलट परफॉर्मेंस अपडेट्स पर कड़ी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यही तय करेगा कि यह प्रोजेक्ट आगे चलकर कंपनी के पोर्टफोलियो में कितना बड़ा बदलाव लाएगा।
