Reliance Industries ने KG बेसिन गैस माइग्रेशन मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सरकार द्वारा **$2.8 बिलियन** की रिकवरी की मांग के चलते यह कानूनी लड़ाई अब एक बड़े मोड़ पर है।
विवाद की जड़ क्या है?
यह मामला कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन में गैस निकालने से जुड़ा है। आरोप है कि Reliance के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने ONGC के ब्लॉक से माइग्रेट होकर आई गैस का अनधिकृत तरीके से उत्पादन और बिक्री की। सरकारी नियमों के मुताबिक, इसे प्रोडक्शन-शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन माना गया है।
दांव पर कितना पैसा?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ब्याज और मुनाफे समेत कुल $2.81 बिलियन की पेनल्टी का दावा किया है। अगर कोर्ट का फैसला सरकार के पक्ष में जाता है, तो यह कंपनी की बैलेंस शीट पर बड़ा असर डाल सकता है।
कानूनी इतिहास और भविष्य की राह
साल 2018 में एक तीन सदस्यीय आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल ने Reliance को राहत दी थी और माना था कि कॉन्ट्रैक्ट में माइग्रेटेड गैस उत्पादन पर कोई स्पष्ट रोक नहीं है। हालांकि, फरवरी 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उस फैसले को पलट दिया और इसे कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण करार दिया।
अब निवेशकों की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर हैं। यह फैसला न केवल कंपनी की वित्तीय स्थिति तय करेगा, बल्कि भारतीय एनर्जी सेक्टर में रिसोर्स एक्सट्रैक्शन और कॉन्ट्रैक्ट इंटरप्रिटेशन के लिए एक नया कानूनी उदाहरण (Precedent) भी सेट करेगा।
