ReNew CEO का बड़ा बयान: न्यूक्लियर एनर्जी के सामने खड़ी है भारी लागत की चुनौती

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
ReNew CEO का बड़ा बयान: न्यूक्लियर एनर्जी के सामने खड़ी है भारी लागत की चुनौती

भारत ने **2047** तक **100 GW** न्यूक्लियर पावर क्षमता का लक्ष्य रखा है, लेकिन ReNew Energy Global के CEO Sumant Sinha ने चेताया है कि इसकी ऊंची निर्माण लागत राह का सबसे बड़ा कांटा साबित हो सकती है।

भारत अपने न्यूक्लियर एनर्जी के विजन को लेकर बेहद गंभीर है। वर्तमान में 10 GW से कम क्षमता से बढ़कर 2047 तक 100 GW तक पहुँचने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, Bloomberg New Economy Forum 2026 में ReNew Energy Global के चेयरमैन और CEO Sumant Sinha ने उन आर्थिक बाधाओं की ओर इशारा किया है जो इस रफ्तार को सुस्त कर सकती हैं। उनका साफ कहना है कि EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) की भारी-भरकम लागत ही सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती है।

लागत का 'न्यूक्लियर' बोझ

एक गीगावाट न्यूक्लियर क्षमता खड़ी करने में ₹15,000 करोड़ से ₹20,000 करोड़ तक का खर्च आता है। कई बार प्रोजेक्ट्स बजट से बाहर निकल जाते हैं, जिससे निवेशकों पर दबाव बढ़ता है। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी का अनुमान है कि 100 GW का लक्ष्य पाने के लिए कुल ₹15 लाख करोड़ के भारी निवेश की जरूरत पड़ेगी।

कोयले और रिन्यूएबल्स से कड़ी टक्कर

भारतीय पावर मार्केट बेहद 'प्राइस सेंसिटिव' है। डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां (Discoms) हमेशा सस्ती बिजली खरीदना पसंद करती हैं। जहाँ कोल पावर सस्ती और भरोसेमंद रही है, वहीं सोलर और विंड एनर्जी की लागत पिछले दशक में काफी कम हुई है। न्यूक्लियर पावर को 'बेस-लोड' बिजली देने के लिए जाना जाता है, लेकिन अगर इसे कोयले का विकल्प बनना है, तो इसे अपनी कीमतों को और अधिक किफायती बनाना होगा। बिना स्टैंडर्डाइज्ड प्रोजेक्ट निष्पादन के, न्यूक्लियर एनर्जी का अन्य ऊर्जा स्रोतों से मुकाबला करना टेढ़ी खीर है।

निवेशकों के लिए क्या है आगे?

निवेशक अब यह देख रहे हैं कि क्या सरकार प्रोजेक्ट की लागत घटाने के लिए कोई नई नीति लाती है, जैसे कि स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स या अप्रूवल प्रोसेस को तेज करना। सेक्टर में प्राइवेट कैपिटल का आना इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां बिना लागत बढ़ाए कितनी कुशलता से पावर दे पाती हैं। आने वाले समय में न्यूक्लियर एनर्जी की सफलता सिर्फ तकनीक पर नहीं, बल्कि समय पर प्रोजेक्ट पूरे करने की क्षमता पर टिकी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.