सरकारी फैसले का RIL पर असर?
6 अप्रैल 2026 को Reliance Industries (RIL) के शेयर ₹1,300.20 के स्तर पर गिरकर 10 महीने के सबसे निचले पॉइंट पर पहुंच गए। यह गिरावट 27 मार्च 2026 को सरकार द्वारा डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर फिर से ड्यूटी लगाने के निर्णय के बाद आई। सरकार ने डीजल पर ₹21.5 प्रति लीटर और ATF पर ₹29.5 प्रति लीटर की ड्यूटी लगाई है, जिसका मुख्य उद्देश्य घरेलू सप्लाई को सुरक्षित रखना है।
SEZ छूट ने कैसे बचाई Reliance की रिफाइनरी?
हालांकि, इस फैसले का RIL की ओवरऑल रिफाइनिंग बिजनेस पर सीधा असर उतना नहीं होगा जितना लग रहा है। इसकी वजह RIL की स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) में स्थित रिफाइनरी है, जो एक बड़ा एक्सपोर्ट हब है। एक अहम कोर्ट के फैसले के चलते, RIL की SEZ रिफाइनरी इन नई एक्सपोर्ट ड्यूटीज से पूरी तरह से एग्ज़ेंप्ट (Exempt) यानी मुक्त है। सरकारी अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) SEZ रिफाइनरी पर लागू नहीं होती। इसलिए, ये लेवीज़ (Levies) मुख्य तौर पर RIL की डोमेस्टिक टैरिफ एरिया (DTA) की वॉल्यूम को प्रभावित करेंगी, न कि एक्सपोर्ट-फोक्स्ड SEZ यूनिट को। इससे मार्जिन पर अनुमानित दबाव काफी कम हो जाएगा।
रिफाइनिंग मार्जिन पर पहले से थे दबाव
SEZ टैक्स एग्ज़ेम्पशन के बावजूद, RIL की रिफाइनिंग प्रॉफिटेबिलिटी पहले से ही कुछ चुनौतियों का सामना कर रही थी। इनमें शामिल हैं: कॉम्प्लेक्स रिफाइनरीज़ में फ्यूल लॉस का बढ़ना (लगभग 2-3%), वेरी लार्ज क्रूड कैरियर (VLCC) शिपमेंट के लिए बढ़ता फ्रेट कॉस्ट (जिससे प्रति बैरल लगभग $2 का अतिरिक्त खर्च आ रहा है), और क्रूड सोर्सिंग प्रीमियम के कारण रिपोर्ट किए गए ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) में संभावित गलतियां। असल में, कंपनी प्रोपेन (Propane) की सप्लाई को LPG प्रोडक्शन की ओर मोड़ रही है ताकि घरेलू मांग को पूरा किया जा सके, जिससे प्रॉफिट पर असर पड़ने की उम्मीद है। कंपनी ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद रिटेल फ्यूल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं, जिससे मार्जिन पर और दबाव बना हुआ है।
एनालिस्ट्स का भरोसा बरकरार
शेयर में तेज गिरावट और मौजूदा ऑपरेशनल चुनौतियों के बावजूद, प्रमुख ब्रोकरेज फर्म्स Reliance Industries पर बुलिश (Bullish) बनी हुई हैं। Motilal Oswal Financial Services ने 'Buy' रेटिंग के साथ टारगेट प्राइस ₹1,750 रखा है, जो मौजूदा स्तरों से काफी बड़ी अपसाइड दिखा रहा है। Jefferies ने भी ₹1,750 के टारगेट के साथ 'Buy' रेटिंग दी है, जबकि JM Financial की 'Buy' रेटिंग के साथ टारगेट ₹1,580 है। एनालिस्ट्स का मानना है कि मध्य-पूर्व में जियो-पॉलिटिकल सप्लाई की दिक्कतें रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल मार्जिन को बढ़ावा दे रही हैं, भले ही रॉ मैटेरियल कॉस्ट बढ़ी हो। वे RIL के एफिशिएंट ऑपरेशन्स, इथेन, रिफाइनरी ऑफ-गैसेस और नैफ्था जैसे विविध फीडस्टॉक सोर्स और टेलीकॉम बिजनेस (Jio) में भविष्य में प्राइस एडजस्टमेंट की संभावना को भी ग्रोथ के अहम ड्राइवर बता रहे हैं। कुल मिलाकर, एनालिस्ट्स की राय में 93% से ज्यादा एनालिस्ट्स इस स्टॉक को खरीदने की सलाह दे रहे हैं।
पॉलिसी अनिश्चितता और वैल्यूएशन की चिंताएँ
हालांकि, कंपनी के सामने कुछ बड़े रिस्क (Risks) भी हैं, खासकर सरकारी पॉलिसी की कंसिस्टेंसी (Consistency) को लेकर। विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) का अचानक फिर से लागू होना, जो पहले हटाया गया था, रेगुलेटरी माहौल में अस्थिरता का संकेत देता है। ऐसी अनिश्चितता एनर्जी कंपनियों के वैल्यूएशन मल्टीपल्स (Valuation Multiples) को कम कर सकती है। RIL की SEZ एग्ज़ेम्पशन से तत्काल चिंताएं कम हुई हैं, लेकिन भविष्य में पॉलिसी बदलने या एनर्जी सेक्टर में सरकार के बड़े एक्शन का जोखिम बना हुआ है। कंपनी का स्टॉक सरकारी कंपनियों जैसे Indian Oil Corporation (IOCL) और Bharat Petroleum (BPCL) की तुलना में उच्च प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो पर भी ट्रेड कर रहा है। RIL का P/E लगभग 21.5x है, जबकि IOCL और BPCL का लगभग 5.4x है। भले ही RIL का P/E अपने तीन साल के औसत से कम है, यह वैल्यूएशन प्रीमियम बताता है कि कंपनी को मौजूदा शेयर प्राइस को जस्टिफाई करने के लिए दमदार अर्निंग ग्रोथ दिखानी होगी, खासकर कमजोर परफॉरमेंस की अवधि के बाद।
डाइवर्सिफाइड बिजनेस एक सुरक्षा कवच
Reliance Industries का अपने टेलीकॉम बिजनेस (Jio) और तेजी से बढ़ते रिटेल सेगमेंट (Reliance Retail) में मजबूत डाइवर्सिफिकेशन, इसके रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल (O2C) ऑपरेशंस से जुड़े साइक्लिकल नेचर (Cyclical Nature) और पॉलिसी रिस्क के खिलाफ एक अहम सुरक्षा कवच प्रदान करता है। 23 अप्रैल 2026 के आसपास आने वाले नतीजों जैसे आगामी फाइनेंशियल रिजल्ट्स, प्रॉफिटेबिलिटी पर ओवरऑल असर को समझने में महत्वपूर्ण होंगे। निवेशक इन नॉन-रिफाइनिंग बिजनेसेज से लॉन्ग-टर्म अर्निंग ग्रोथ पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं, जो RIL को एनालिस्ट्स द्वारा निर्धारित महत्वाकांक्षी प्राइस टारगेट्स को हासिल करने में मदद कर सकता है। फिलहाल, शेयर प्राइस में तेज गिरावट और एक्सपोर्ट ड्यूटीज के स्पेसिफिक इंपैक्ट के बीच का कंट्रास्ट, साथ ही एनालिस्ट्स का लगातार भरोसा, निवेशकों के लिए एक मिले-जुले आउटलुक (Outlook) को दर्शाता है।