कोर्ट का फैसला: सरकार की राह खुली
दिल्ली हाईकोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले ने Reliance Industries (RIL) के लिए कानूनी चुनौतियां बढ़ा दी हैं। कोर्ट ने सरकार की उस अपील को आगे बढ़ाने की इजाजत दे दी है, जो तीन दशक पुराने Panna Mukta और Tapti ऑयल और गैस फील्ड्स के विवाद से जुड़ी है। RIL और उसके सहयोगियों की प्रारंभिक आपत्तियों को कोर्ट ने खारिज कर दिया, जिससे सरकार अब इस मामले में $3.86 बिलियन की रिकवरी के अपने दावे पर आगे बढ़ सकेगी।
विवाद का पूरा लेखा-जोखा
यह मामला प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट्स (PSCs) से जुड़ा है, जो 1990 के दशक की शुरुआत में Panna Mukta और Tapti ऑफशोर ऑयल और गैस फील्ड्स के लिए साइन किए गए थे। सरकार का दावा है कि RIL और उसके पार्टनर्स ने इन फील्ड्स से अपनी लागत की वसूली और मुनाफे के बंटवारे में नियमों का पालन नहीं किया। एक आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल के आंशिक अवार्ड के आधार पर सरकार यह रकम मांग रही है। पहले एक सिंगल जज बेंच ने जुलाई 2023 में सरकार की रिकवरी याचिका को अपरिपक्व मानते हुए खारिज कर दिया था, लेकिन अब एक डिवीजन बेंच ने उस फैसले को पलट दिया है।
RIL पर कितना बड़ा दबाव?
लगभग ₹18.8 लाख करोड़ के मार्केट कैपिटलाइजेशन वाली RIL के लिए यह एक महत्वपूर्ण वित्तीय मामला है। फरवरी 2026 की शुरुआत में कंपनी का P/E रेश्यो 19.31x से 27.11x के बीच रहा, और 2 फरवरी 2026 को शेयर की कीमत ₹1390.40 के आसपास कारोबार कर रही थी। हालांकि RIL का बिजनेस कई क्षेत्रों में फैला है, इस आर्बिट्रेशन में हार कंपनी के लिए बड़ी प्रोविजन्स करने का कारण बन सकती है।
लंबी कानूनी लड़ाई का इतिहास
इस विवाद की जड़ें 1992 में ONGC (सरकार की ओर से) और RIL तथा Enron Oil and Gas India (जिसे बाद में BG Exploration and Production India ने संभाला) के बीच हुए PSCs में हैं। विभिन्न कॉन्ट्रैक्टुअल शर्तों, जिनमें रॉयल्टी और टैक्स शामिल थे, को लेकर असहमति हुई जिसके कारण आर्बिट्रेशन का सहारा लिया गया। सालों से, इंग्लिश कोर्ट्स सहित कई जगहों पर आर्बिट्रेशन अवार्ड्स और कोर्ट की चुनौतियां सामने आई हैं। आखिरकार, सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में एनफोर्समेंट पिटीशन दायर की, जिस पर अब सुनवाई का रास्ता साफ हुआ है।
कब होगी अगली सुनवाई?
इस पूरे मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 17 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है। इस सुनवाई के नतीजे RIL के वित्तीय प्रदर्शन पर असर डाल सकते हैं, हालांकि कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति और विविध व्यावसायिक मॉडल तत्काल बड़े झटकों के असर को कुछ हद तक कम कर सकते हैं। निवेशक इस कानूनी प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखेंगे, खासकर इस मामले में शामिल बड़ी रकम और विवाद की लंबी अवधि को देखते हुए।