कतर से आने वाले लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) टैंकरों ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से अपनी सामान्य आवाजाही फिर से शुरू कर दी है। यह भारत के लिए बड़ी राहत की खबर है, क्योंकि इससे दहेज (Dahej) जैसे प्रमुख टर्मिनल पर गैस की सप्लाई स्थिर होगी और एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूती मिलेगी।
अगस्त के दौरान क्षेत्रीय तनाव के कारण रास लफ्फान (Ras Laffan) टर्मिनल से टैंकरों का निकलना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया था। सुरक्षा कारणों से कई ऑपरेटर्स ने ट्रैकिंग सिग्नल बंद कर दिए थे, जिससे सप्लाई चेन में अनिश्चितता पैदा हो गई थी। अब जहाजों की विजिबल आवाजाही दोबारा शुरू होने से ऊर्जा बाजार में डर का माहौल कम हुआ है।
भारत की एनर्जी सप्लाई पर असर
यह विकास भारतीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, 'अल घाशमिया' (Al Ghashamiya) जैसे जहाज सफलतापूर्वक दहेज पोर्ट पर डिलीवरी कर चुके हैं। चूंकि भारत अपनी बिजली संयंत्रों और सिटी गैस वितरण नेटवर्क के लिए LNG आयात पर काफी निर्भर है, इसलिए इस रूट पर किसी भी तरह की बाधा से फ्रेट कॉस्ट और डिलीवरी शेड्यूल पर बुरा असर पड़ता है। जब शिपिंग ऑपरेशंस 'डार्क' हो जाते हैं, तो कंपनियों को इंश्योरेंस और लॉजिस्टिक्स के लिए अधिक खर्च करना पड़ता है।
क्षेत्रीय जोखिम और सतर्कता
हालात में सुधार के बावजूद, होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव का केंद्र बना हुआ है। QatarEnergy या जहाज संचालकों की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा 'मॉनिटरेबल' फैक्टर शिपमेंट्स की निरंतरता है। यदि यह प्रवाह बना रहता है, तो एनर्जी की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी। हालांकि, अगर तनाव फिर बढ़ा, तो शिपिंग कंपनियां दोबारा अपने रूट बदल सकती हैं, जिससे भारतीय इंपोर्टर्स के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
