पंजाब में कोयले की भारी कमी के चलते बिजली संकट गहरा गया है। राज्य में **1,500 MW** बिजली का उत्पादन घट गया है, जिससे राजपुरा और तलवंडी साबो जैसे थर्मल प्लांट अपनी क्षमता के आधे पर काम कर रहे हैं।
पंजाब का ऊर्जा ढांचा इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहा है। कोयले की राष्ट्रीय स्तर पर हो रही कमी के कारण राज्य का थर्मल पावर जनरेशन 1,500 MW गिर गया है। इसका सीधा असर Nabha Power Limited (L&T Power Development की सहायक कंपनी) द्वारा संचालित राजपुरा प्लांट और Vedanta की सहायक कंपनी Talwandi Sabo Power Limited पर पड़ा है, जो अब अपनी कुल क्षमता के सिर्फ 50% पर काम कर रहे हैं।
औद्योगिक हब पर असर
इस बिजली कटौती की मार लुधियाना, मोहाली और मंडी गोबिंदगढ़ जैसे औद्योगिक केंद्रों पर साफ देखी जा रही है। उत्पादन प्रभावित होने से न केवल मैन्युफैक्चरिंग पर असर पड़ रहा है, बल्कि लागत भी बढ़ रही है। Punjab State Power Corporation Limited (PSPCL) के लिए भी यह एक वित्तीय चुनौती बन गई है। जब राज्य में बिजली उत्पादन मांग पूरी नहीं कर पाता, तो PSPCL को महंगे दामों पर ओपन मार्केट से बिजली खरीदनी पड़ती है, जिससे कंपनी के मार्जिन पर दबाव बढ़ना तय है।
क्या है देश भर का हाल?
यह संकट सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं है। सितंबर 2026 की शुरुआत तक, भारत में लगभग 50 थर्मल पावर प्लांट, जिनकी कुल क्षमता 224 GW है, कोयले के बेहद कम स्टॉक का सामना कर रहे हैं। इनमें से कई प्लांट के पास सिर्फ 9 दिनों का कोयला बचा है, जो सुरक्षा मानकों के हिसाब से काफी कम है। फिलहाल, कोयला आपूर्ति की श्रृंखला बहाल करना ही इस संकट का एकमात्र समाधान है, जिस पर सरकार और निवेशकों की नजर टिकी है।
