Punjab Power Crisis: कोयले की किल्लत से बिजली का संकट गहराया, 1,500 MW उत्पादन ठप

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AuthorMehul Desai|Published at:
Punjab Power Crisis: कोयले की किल्लत से बिजली का संकट गहराया, 1,500 MW उत्पादन ठप

पंजाब में बिजली का संकट विकराल हो गया है। कोयले की भारी कमी के चलते मुख्य थर्मल पावर प्लांट अपनी आधी क्षमता पर ही काम कर रहे हैं, जिससे राज्य में **1,500 MW** की बिजली की कमी हो गई है और कटौती का दौर शुरू हो गया है।

पंजाब के थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले की सप्लाई चेन में आई बाधाओं ने राज्य की बिजली व्यवस्था को पटरी से उतार दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में बिजली उत्पादन में 1,500 MW की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर आम घरों और इंडस्ट्रीज पर पड़ रहा है।

पावर प्लांट्स पर क्या है असर?

संकट की मार सबसे ज्यादा Nabha Power Limited द्वारा संचालित राजपुरा थर्मल प्लांट और तलवंडी साबो थर्मल पावर प्लांट पर दिख रही है। ये प्लांट्स अपनी कुल क्षमता के केवल 50% पर ही काम कर पा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि थर्मल पावर प्लांट्स में फिक्स्ड कॉस्ट (जैसे मेंटेनेंस और कर्ज का ब्याज) अधिक होती है, ऐसे में 50% क्षमता पर काम करने से इन कंपनियों के नेट प्रॉफिट मार्जिन और कैश फ्लो पर बुरा असर पड़ सकता है।

पूरे देश में कोयला संकट का असर

यह केवल पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भारत में लगभग 63 GW पावर जनरेशन क्षमता कोयले की कमी के चलते प्रभावित है। अधिकतर प्लांट्स के पास केवल कुछ ही दिनों का स्टॉक बचा है, जो सप्लाई चेन के बड़े बॉटलनेक को दर्शाता है।

अब बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार कोयला सप्लाई को कब तक सामान्य कर पाती है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो बिजली कंपनियों के लिए अपने पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) को पूरा करना मुश्किल हो सकता है, जिससे भविष्य में उनके ऑपरेशनल खर्चों में भारी बढ़ोतरी की आशंका है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.