अरुणाचल प्रदेश के **11,200 MW** के Siang Upper Multipurpose Project को लेकर तनाव चरम पर है। विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसक झड़प में **4** लोग घायल हो गए हैं, जिससे पावर सेक्टर के निवेशकों के लिए प्रोजेक्ट में देरी और लागत बढ़ने का बड़ा रिस्क (Execution Risk) पैदा हो गया है।
बिगड़ते हालात और प्रोजेक्ट की चुनौती
अरुणाचल प्रदेश के Dite-Dime इलाके में जारी 12 घंटे के स्थानीय बंद के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े, जिसमें 4 लोगों के घायल होने की खबर है। यह संघर्ष स्थानीय समुदायों और सरकार के बीच जमीन के अधिकारों और पारदर्शिता को लेकर जारी विवाद का नतीजा है।
क्यों है यह प्रोजेक्ट इतना जरूरी?
यह 11,200 MW का मेगा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट रणनीतिक रूप से भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू का मानना है कि यह प्रोजेक्ट न केवल पानी के बहाव को रेगुलेट करेगा, बल्कि सीमा पार चीन द्वारा Yarlung Tsangpo नदी पर किए जा रहे निर्माण कार्यों का मुकाबला करने के लिए भी एक जरूरी कदम है।
निवेशकों के लिए रिस्क फैक्टर
पावर सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों और निवेशकों के लिए यह घटना एक बड़े 'एक्जीक्यूशन रिस्क' (Execution Risk) को दिखाती है। ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स बहुत ज्यादा कैपिटल-इंटेंसिव होते हैं और इन्हें पूरा होने में दशकों का समय लगता है। अगर स्थानीय विरोध और जमीन विवाद बढ़ते हैं, तो इसके दो सीधे असर हो सकते हैं:
- कॉस्ट ओवररन्स (Cost Overruns): प्रोजेक्ट में देरी से लागत में भारी इजाफा हो सकता है।
- रेवेन्यू में देरी: लंबे समय तक प्रोजेक्ट के रुकने से कंपनी के फाइनेंशियल हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है।
आगे क्या होगा?
Arunachal Pradesh Congress Committee ने फिलहाल सभी फील्ड सर्वे पर रोक लगाने की मांग की है। Siang और Upper Siang जिलों में आर्थिक गतिविधियां ठप हैं। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या सरकार और स्थानीय प्रशासन के बीच कोई ठोस बातचीत हो पाती है, या यह गतिरोध प्रोजेक्ट को लंबी अनिश्चितता में धकेल देगा।
