कंपनी के मैनेजमेंट ने IPO फंड्स के इस्तेमाल को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की है। कुल ₹12,914 मिलियन के ग्रॉस IPO प्रॉसीड्स में से ₹12,337.56 मिलियन यानी 95.54% राशि 31 दिसंबर 2025 तक खर्च की जा चुकी है। यह कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) खास तौर पर सब्सिडियरी Premier Energies Global Environment Private Limited (PEGEPL) के जरिए 4 GW सोलर PV TOPCon सेल और 4 GW सोलर PV TOPCon मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाने के लिए था।
फंड्स का पूरा हिसाब-किताब
- कुल ग्रॉस IPO प्रॉसीड्स: ₹12,914 मिलियन
- कुल इस्तेमाल की गई राशि: ₹12,337.56 मिलियन (95.54%)
- PEGEPL (मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी) के लिए:
- इस्तेमाल: ₹9,175.12 मिलियन (सिविल वर्क और प्लांट/मशीनरी के लिए)
- बिना इस्तेमाल: ₹510.91 मिलियन
- जनरल कॉर्पोरेट पर्पज़ेज़ (GCP) के लिए:
- इस्तेमाल: ₹2,661.88 मिलियन (सब्सिडियरी में निवेश, GST जैसे कंपनी खर्चे)
- बिना इस्तेमाल: ₹40.98 मिलियन
- इश्यू एक्सपेंस:
- इस्तेमाल: ₹500.56 मिलियन
- बिना इस्तेमाल: ₹24.55 मिलियन
प्रोजेक्ट का नया पता और स्टेटस
CRISIL Ratings की Monitoring Agency Report के अनुसार, 4 GW सोलर PV सेल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का स्थान बदला गया है। यह प्रोजेक्ट मूल रूप से तेलंगाना के Ranga Reddy District में लगना था, लेकिन अब इसे Andhra Pradesh के Tirupati District में शिफ्ट कर दिया गया है। कंपनी के शेयरहोल्डर्स ने 06 अप्रैल 2025 को एक स्पेशल रेजोल्यूशन (Special Resolution) के जरिए इस बदलाव को मंजूरी दी थी। कंपनी का मकसद इस रणनीतिक कदम से ऑपरेशनल सिनर्जी (Operational Synergy) और बैकवर्ड इंटीग्रेशन (Backward Integration) को बढ़ाना है। हालांकि, मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी संभवतः तेलंगाना में ही रहेगी।
बाकी अप्रूवल्स और आगे का रास्ता
कंपनी ने प्रोजेक्ट के लिए ज्यादातर स्टैचुटरी अप्रूवल्स (Statutory Approvals) हासिल कर लिए हैं। हालांकि, कुछ अहम क्लीयरेंस (Clearances) अभी भी पेंडिंग हैं, जिनमें PESO अप्रूवल, इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन ड्राइंग अप्रूवल, पावर डिमांड एनहांसमेंट और PESO से लाइसेंस टू स्टोर एंड हैंडल हज़ार्डस सब्सटैंसेज शामिल हैं। रिपोर्ट में प्रोजेक्ट के ओवरऑल इंप्लीमेंटेशन टाइमलाइन में किसी बड़ी देरी का जिक्र नहीं है। बचे हुए फंड्स को सावधानीपूर्वक फिक्स्ड डिपॉज़िट्स (Fixed Deposits) और करंट अकाउंट्स में रखा गया है, जो फंड्स के कुशल ट्रेजरी मैनेजमेंट (Treasury Management) को दर्शाता है।
रिस्क और आउटलुक
निवेशकों को पेंडिंग स्टैचुटरी अप्रूवल्स, खासकर PESO से मिलने वाली मंजूरियों की टाइमलाइन पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इसमें देरी से प्रोजेक्ट कमीशनिंग (Commissioning) शेड्यूल प्रभावित हो सकता है। मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का लोकेशन बदलना, हालांकि मंजूर हो चुका है, एक एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) पैदा करता है जिसे मैनेज करना अहम होगा। IPO प्रॉसीड्स का इतना बड़ा हिस्सा इस्तेमाल होना प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता दिखाता है, लेकिन सफल समापन रेगुलेटरी लैंडस्केप (Regulatory Landscape) और नई लोकेशन की चुनौतियों से निपटने पर निर्भर करेगा। कंपनी के ओवरऑल ऑपरेशनल परफॉरमेंस (Operational Performance) और हाल के वर्षों में सुधरते मार्जिन्स (Margins) को देखते हुए एक पॉजिटिव माहौल है, लेकिन इस बड़े प्रोजेक्ट का सफल डिप्लॉयमेंट (Deployment) और ऑपरेशनल होना अगले कुछ समय के लिए एक महत्वपूर्ण वॉचपॉइंट (Watchpoint) बना रहेगा।