Powerica का जलवा! SECI से जीता 100 MW विंड प्रोजेक्ट, ₹3.85 प्रति यूनिट मिलेगा रेट

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Powerica का जलवा! SECI से जीता 100 MW विंड प्रोजेक्ट, ₹3.85 प्रति यूनिट मिलेगा रेट

Powerica Limited ने सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) से **100 MW** का विंड पावर प्रोजेक्ट जीता है। कंपनी को हर यूनिट के लिए **₹3.85** का रेट मिलेगा। यह पिछले हफ्ते गुजरात में जीते **50 MW** प्रोजेक्ट के बाद एक और बड़ी जीत है।

Powerica के ऑर्डर बुक में जुड़ा नया प्रोजेक्ट

सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) ने प्रतिस्पर्धी ई-रिवर्स ऑक्शन (e-reverse auction) के जरिए Powerica Limited को 2,000 MW विंड एनर्जी टेंडर का एक हिस्सा, यानी 100 MW का प्रोजेक्ट आवंटित किया है। कंपनी को इस प्रोजेक्ट के लिए ₹3.85 प्रति यूनिट का टैरिफ मिला है। उम्मीद है कि जल्द ही कंपनी को आधिकारिक लेटर ऑफ अवार्ड (Letter of Award) मिल जाएगा, जिसके बाद पावर परचेज एग्रीमेंट (Power Purchase Agreement) पर हस्ताक्षर होंगे।

लगातार दूसरी बड़ी जीत

यह प्रोजेक्ट Powerica की हालिया सफलता की कड़ी में अगला है। पिछले हफ्ते ही, यानी 9 जुलाई 2026 को, कंपनी ने गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (GUVNL) से 50 MW का विंड प्रोजेक्ट जीता था, जिसका टैरिफ ₹3.51 प्रति यूनिट था। इस तरह, कंपनी एक ही महीने में दो बड़ी परियोजनाओं को हासिल करने में सफल रही है। अब निवेशकों की नजर कंपनी की इन लगातार मिल रही बड़ी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की क्षमता पर होगी, क्योंकि इतने बड़े एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश और सटीक इंजीनियरिंग की जरूरत होती है।

लागत और मुनाफे का गणित

विंड एनर्जी सेक्टर में मुनाफा कई चीजों पर निर्भर करता है, जैसे विंड टरबाइन के पार्ट्स की लागत, जमीन की खरीद और ग्रिड कनेक्टिविटी की स्पीड। भले ही प्रतिस्पर्धी टैरिफ पर प्रोजेक्ट जीतना एक अच्छी बात है, लेकिन असली मार्जिन इस बात पर निर्भर करता है कि कंपनी इन खर्चों को कितनी कुशलता से नियंत्रित करती है। Powerica अपनी इन-हाउस इंजीनियरिंग पर निर्भर है ताकि बाहरी कॉन्ट्रैक्टर्स पर निर्भरता कम हो सके। हालांकि, भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर में देरी और टरबाइन बनाने के लिए कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियाँ आम हैं। निवेशक प्रोजेक्ट शुरू होने की समय-सीमा पर अपडेट पर नजर रख सकते हैं, क्योंकि इंस्टॉलेशन में देरी से कैश फ्लो और निवेश पर रिटर्न पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, क्षमता विस्तार के लिए जरूरी फंडिंग को देखते हुए कंपनी के डेट लेवल (debt levels) पर नजर रखना भी महत्वपूर्ण होगा।

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