Ministry of Power अब Power System Development Fund (PSDF) को FY31 तक बढ़ाने की कोशिश में है। यह कदम रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए बड़ा रिलीफ हो सकता है, क्योंकि इस समय **35 GW** से ज्यादा की क्षमता ग्रिड कंजेशन (Grid Congestion) के चलते खतरे में है, जिसका असर कंपनियों के रेवेन्यू पर पड़ सकता है।
भारत सरकार का पावर मंत्रालय अब Power System Development Fund (PSDF) को 16वें फाइनेंस कमीशन के चक्र तक यानी FY27 से FY31 के बीच जारी रखने के लिए कैबिनेट की मंजूरी मांग रहा है। यह फंड ग्रिड की स्टेबिलिटी बनाए रखने के लिए बेहद अहम है, खासकर उन प्रोजेक्ट्स के लिए जो कमर्शियल नहीं हैं। इस साल के यूनियन बजट में इसके लिए ₹1,103 करोड़ का आवंटन पहले ही किया जा चुका है।
क्यों है यह कदम जरूरी?
देश में रिन्यूएबल एनर्जी की रफ्तार तो बढ़ रही है, लेकिन ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार उतनी तेज नहीं है। Crisil Ratings के मुताबिक, रिन्यूएबल कैपेसिटी की तुलना में ग्रिड का विकास धीमा है, जिससे ग्रिड कर्टेलमेंट (Grid Curtailment) का बड़ा रिस्क पैदा हो गया है। सरल शब्दों में कहें तो बिजली पैदा तो हो रही है, लेकिन उसे ग्रिड तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। वित्त वर्ष 2027 में लगभग 35 GW की रिन्यूएबल कैपेसिटी इसी कारण से ठप पड़ सकती है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
पावर डेवलपर्स के लिए यह एक सीधा फाइनेंशियल रिस्क है। अगर बिजली ग्रिड में नहीं जा पाएगी, तो वह बिकेगी नहीं, जिससे कंपनी का कैश फ्लो और मुनाफा दोनों बुरी तरह प्रभावित होंगे। कंपनी का डेट रिपेमेंट (Debt Repayment) ट्रैक भी इससे बिगड़ सकता है।
खासतौर पर वे कंपनियां जो Temporary General Network Access (TGNA) पर निर्भर हैं, उन्हें लॉन्ग टर्म एक्सेस वाले डेवलपर्स की तुलना में ज्यादा रिस्क है। निवेशकों को सलाह है कि वे कंपनी के नेटवर्क एक्सेस स्टेटस और ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स की प्रोग्रेस पर पैनी नजर रखें।
