बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने **2.3 GW** से ज्यादा की बिजली क्षमता को गुजरात, तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर के बीच री-एलोकेट (Reallocate) किया है।
देश के ऊर्जा मंत्रालय ने बढ़ते बिजली संकट और पीक डिमांड को देखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने सेंट्रल प्लांट्स से करीब 2.3 GW बिजली क्षमता को तीन राज्यों- गुजरात, तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर को आवंटित किया है। इसमें से सबसे ज्यादा फायदा गुजरात को मिला है, जिसे 1.6 GW की अतिरिक्त सप्लाई मिलेगी। वहीं, तमिलनाडु को 421 MW और जम्मू-कश्मीर को 329 MW बिजली दी जाएगी।
पावर कंपनियों पर क्या होगा असर?
यह बिजली NTPC और North Eastern Electric Power Corporation जैसे बड़े जेनरेटरों के सरेंडर किए गए कोटे से ली जा रही है। NTPC जैसी कंपनियों के लिए यह एक सकारात्मक खबर है क्योंकि इससे उनके थर्मल और गैस-आधारित प्लांट्स की कैपेसिटी यूटिलाइजेशन (Capacity Utilization) बढ़ेगी। बाराह-I, दादरी-I और बोंगाईगांव जैसे स्टेशनों से सप्लाई बढ़ने से कंपनी को अपना फिक्स्ड कॉस्ट निकालने और रेवेन्यू में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
निवेशकों के लिए चेतावनी: पेमेंट का पेंच
हालांकि, सिर्फ ज्यादा बिजली सप्लाई से निवेशकों को खुश नहीं होना चाहिए। इस सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती राज्य सरकार की डिस्कॉम (DISCOMs) कंपनियों की खराब वित्तीय हालत है। बिजली की सप्लाई तो बढ़ रही है, लेकिन असली मुनाफा तब होगा जब ये डिस्कॉम समय पर भुगतान (Payment Discipline) करें। अक्सर पेमेंट में देरी के कारण पावर कंपनियों का वर्किंग कैपिटल साइकिल प्रभावित होता है और रिसीवेबल्स (Receivables) बढ़ जाते हैं।
निवेशकों को सलाह है कि वे केवल कैपेसिटी यूटिलाइजेशन पर ध्यान न दें, बल्कि भविष्य के रिजल्ट्स में कंपनियों के बकाया पेमेंट और सरकारी लिक्विडिटी सपोर्ट स्कीमों की प्रोग्रेस पर भी नजर रखें।
