केंद्रीय मंत्री Shripad Yesso Naik ने भारत की एनर्जी सप्लाई चेन को डाइवर्सिफाई करने का आह्वान किया है। इसका मकसद ग्लोबल निर्भरता घटाकर घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है, जिससे सोलर और बैटरी सेक्टर के लिए नए अवसर खुलेंगे।
आत्मनिर्भरता की ओर कदम
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री Shripad Yesso Naik ने 'Singapore International Energy Week' के दौरान साफ किया है कि भारत को अपनी एनर्जी सिक्योरिटी के लिए अब ग्लोबल सप्लाई चेन पर कम निर्भर रहना होगा। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि क्रिटिकल मिनरल्स और शिपिंग रास्तों में अस्थिरता देश की एनर्जी जरूरतों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। सरकार अब रिन्यूएबल एनर्जी वैल्यू चेन को पूरी तरह से घरेलू बनाने की दिशा में काम कर रही है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
भारत फिलहाल सोलर सेल और बैटरी रॉ मटेरियल के लिए भारी आयात पर निर्भर है। सरकार की यह नई नीति उन कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है जो घरेलू स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग कर रही हैं या वर्टिकल इंटीग्रेशन (Vertical Integration) पर फोकस कर रही हैं। जो कंपनियां सप्लाई चेन के जोखिमों को कम कर पाएंगी, उनके मार्जिन पर ग्लोबल कच्चे माल की कीमतों का असर कम होगा।
बैटरी और स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
सरकार का पूरा ध्यान अब 'एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरी' के प्रोडक्शन पर है, जो इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर और ग्रिड स्टेबिलिटी के लिए रीढ़ की हड्डी की तरह हैं। आने वाले समय में रिन्यूएबल एनर्जी को स्टोर करने की क्षमता ही सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स की सफलता तय करेगी। हालांकि, इस पूरे ट्रांजिशन में काफी कैपिटल खर्च होगा, इसलिए निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स शुरू करने की तैयारी कर रही हैं।
