Power Grid की बड़ी डील: ₹5,300 करोड़ का 'ग्रीन लोन' मिला, Khavda-Nagpur प्रोजेक्ट को मिलेगी रफ्तार

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AuthorAditya Rao|Published at:
Power Grid की बड़ी डील: ₹5,300 करोड़ का 'ग्रीन लोन' मिला, Khavda-Nagpur प्रोजेक्ट को मिलेगी रफ्तार

Power Grid Corporation ने Khavda-Nagpur HVDC ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के लिए जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (JBIC) से **80 अरब येन** का ग्रीन लोन हासिल किया है। यह फंड रिन्यूएबल एनर्जी को नेशनल ग्रिड से जोड़ने में मदद करेगा।

पावर ग्रिड का बड़ा ऐलान: 'ग्रीन लोन' से प्रोजेक्ट को मिलेगी नई उड़ान

Power Grid Corporation of India ने अपने एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए 80 अरब येन (लगभग ₹5,300 करोड़) का ग्रीन लोन सुरक्षित कर लिया है। यह लोन जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (JBIC) की ओर से दिया गया है। इस फंड का इस्तेमाल खास तौर पर Khavda-Nagpur हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के विकास के लिए किया जाएगा। यह डील 17 जून, 2026 को फाइनल हुई, जो भारत के नेशनल ग्रिड में रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।

फाइनेंसियल मूव्स: बोरिंग कैपेसिटी बढ़ाने की तैयारी

यह लोन ऐसे समय में आया है जब Power Grid बड़े पैमाने पर कैपिटल स्पेंडिंग की तैयारी कर रही है। 26 जून, 2026 को कंपनी के बोर्ड ने शेयरधारकों की मंजूरी के लिए टोटल बोरिंग लिमिट को 1.8 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा, बोर्ड ने बैंक ऑफ बड़ौदा से एक्सटर्नल कमर्शियल बोरिंग्स के जरिए $500 मिलियन तक जुटाने की भी मंजूरी दे दी है। ये कदम कंपनी की महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन को फंड करने की ब्रॉडर स्ट्रैटेजी का हिस्सा हैं।

HVDC ट्रांसमिशन का असर

Khavda-Nagpur प्रोजेक्ट, ट्रांसमिशन डेवलपमेंट की उन सीरीज़ का हिस्सा है जिनका मकसद गुजरात के Khavda जैसे रिन्यूएबल एनर्जी से भरपूर इलाकों से पावर को बड़े कंजम्पशन सेंटर्स तक पहुंचाना है। लंबी दूरी के पावर ट्रांसमिशन के लिए HVDC टेक्नोलॉजी को ज्यादा बेहतर माना जाता है, क्योंकि यह पारंपरिक AC लाइनों की तुलना में एनर्जी लॉस को कम करती है। निवेशकों के लिए, ग्रीन लोन हासिल करने की कंपनी की क्षमता उसके मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल को दर्शाती है, जिससे अक्सर स्टैंडर्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स की तुलना में बेहतर इंटरेस्ट रेट मिल सकते हैं।

निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें

जैसे-जैसे कंपनी अपने प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही है, निवेशक इस बात पर नज़र रख सकते हैं कि बढ़ी हुई बोरिंग लिमिट आने वाली तिमाहियों में कंपनी के डेट-टू-इक्विटी रेशियो और इंटरेस्ट कॉस्ट को कैसे प्रभावित करती है। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स लेते समय, इन ट्रांसमिशन लाइनों का समय पर कमीशनिंग भविष्य के रेवेन्यू ग्रोथ के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर बना रहेगा। कंपनी की मजबूत प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखते हुए बड़े डेट लोड को मैनेज करने की क्षमता आने वाले फाइनेंशियल डिस्क्लोजर्स में देखने लायक होगी।

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