पावर सेक्टर की दिग्गज कंपनी Power Grid Corporation of India की ऑर्डर बुक अब **₹2.2 लाख करोड़** के स्तर पर पहुंच गई है। बाड़मेर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट जैसे बड़े ऑर्डर्स मिलने से कंपनी का पाइपलाइन मजबूत हुआ है, हालांकि तिमाही नतीजों में मुनाफे में मामूली गिरावट और एक्सचेंज द्वारा लगाए गए जुर्माने पर निवेशकों की नजर है।
प्रोजेक्ट्स की धूम और ग्रोथ का विजन
Power Grid ने अपने प्रोजेक्ट पाइपलाइन का दायरा तेजी से बढ़ाया है। अगस्त के अंत में कंपनी को मिले नए कॉन्ट्रैक्ट्स में बाड़मेर का ₹26,000 करोड़ का ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट और गुजरात का 6,500 MW का रिन्यूएबल एनर्जी इंटीग्रेशन प्रोजेक्ट शामिल है। कंपनी अब 'टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग' (TBCB) पर जोर दे रही है, जो उसे बड़े सरकारी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में बढ़त दिला रहा है। साल 2036 तक 914 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल कैपेसिटी हासिल करने के भारत के लक्ष्य में कंपनी की भूमिका अहम बनी हुई है।
फाइनेंशियल हेल्थ और कर्ज का गणित
FY27 की पहली तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹11,697 करोड़ रहा, जिसमें सालाना आधार पर 2% की बढ़ोतरी दिखी। हालांकि, रेगुलेटरी अप्रूवल में देरी की वजह से कंपनी का नेट प्रॉफिट 0.9% गिरकर ₹3,598 करोड़ रहा। कंपनी के बड़े विस्तार को देखते हुए शेयरधारकों ने बोरिंग लिमिट बढ़ाकर ₹2.2 लाख करोड़ करने की मंजूरी दी है। साथ ही, FY27 के लिए ₹37,000 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) प्लान किया गया है, जिसके लिए कंपनी को अपने बढ़ते कर्ज का सावधानी से प्रबंधन करना होगा।
गवर्नेंस पर सवाल
ऑर्डर बुक में उछाल के बावजूद, कंपनी को एडमिनिस्ट्रेटिव स्टैंडर्ड्स पर सख्ती का सामना करना पड़ा है। जून तिमाही के दौरान, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने बोर्ड और कमेटी कंपोजिशन के नियमों का पालन न करने के लिए कंपनी पर ₹11.36 लाख का जुर्माना लगाया है। भले ही यह रकम कंपनी के आकार के हिसाब से छोटी है, लेकिन कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मोर्चे पर यह निवेशकों के लिए एक अलर्ट जरूर है।
