नेपाल के त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में आई तबाही के बाद सर्वाइवर्स ने Power China Corporation के एक सुपरवाइजर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दावा है कि चेतावनी मिलने के बावजूद कर्मचारियों को टनल के अंदर छोड़कर सुपरवाइजर खुद वहां से भाग गया।
26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर ग्लेशियर फटने के कारण आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस त्रासदी के केंद्र में त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट है, जहां कॉन्ट्रैक्टर कंपनी Power China Corporation (POWERCHINA) की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
सर्वाइवर्स, जिनमें वर्कर राज छेत्री भी शामिल हैं, ने दावा किया है कि घटना के वक्त टनल नंबर 3 में 265 कर्मचारी मौजूद थे। आरोप है कि कंपनी के सुपरवाइजर को आपदा की पूर्व चेतावनी मिल चुकी थी, फिर भी उसने कर्मचारियों को सूचित करने के बजाय खुद को बचाना बेहतर समझा और उन्हें टनल में ही छोड़ दिया।
क्षेत्र पर असर और चुनौतियां
इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1,100 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है, जबकि रसुवा और नुवाकोट जिलों में हजारों लोग लापता हैं। सड़कों और पुलों के नष्ट होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद मुश्किल हो गया है। नेपाल सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए अंतरराष्ट्रीय टीमों को तैनात किया है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों और मार्केट एनालिस्ट्स के लिए यह घटना इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़े ऑपरेशन्ल और रिप्यूटेशनल रिस्क को दिखाती है। पावर कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन ऑफ चाइना (SSE: 601669) के लिए आने वाला समय मुश्किल भरा हो सकता है। यदि कंपनी पर कानूनी कार्रवाई होती है, तो प्रोजेक्ट्स में देरी और भारी आर्थिक नुकसान का डर बना हुआ है। अब मार्केट की नजर इस बात पर है कि कंपनी अपनी सुरक्षा नीतियों और इन आरोपों पर क्या सफाई देती है।
