कतर से सप्लाई ठप्प, Petronet LNG के शेयर धड़ाम
कतर एनर्जी (QatarEnergy) द्वारा फोर्स मेज्योर (Force Majeure) घोषित किए जाने के बाद Petronet LNG के शेयरों में भारी गिरावट आई है। NSE पर कंपनी का स्टॉक 10% गिरकर ₹277.80 के निचले स्तर पर पहुंच गया। कतर में ईरानी ड्रोन हमले के बाद उत्पादन रुकने से यह फैसला लिया गया है, जो भारत को मिलने वाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सबसे बड़ी सप्लाई को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। इस झटके के चलते कई औद्योगिक क्षेत्रों में गैस की सप्लाई में 10% से 40% तक की कटौती करनी पड़ी है, हालांकि रिटेल CNG सप्लाई पर फिलहाल कोई असर नहीं है। इस घटना ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंताएं खड़ी कर दी हैं। ट्रेडिंग वॉल्यूम भी बढ़कर 74 लाख शेयरों पर पहुंच गया, जो निवेशकों की बढ़ी चिंता को दर्शाता है।
भारत की एनर्जी इम्पोर्ट पर भारी निर्भरता
यह मामला भारत की एनर्जी इम्पोर्ट (Energy Import) पर भारी निर्भरता को भी उजागर करता है। कतर भारत का सबसे बड़ा इंपोर्टेड नेचुरल गैस सप्लायर है, जो देश की कुल सालाना करीब 2.7 करोड़ टन LNG इंपोर्ट का लगभग 40% हिस्सा है। Petronet LNG के पास कतर से सालाना 85 लाख टन LNG खरीदने का एक लंबा कॉन्ट्रैक्ट है। ऐसे में, यह सप्लाई ठप्प होना बड़ी समस्या है, खासकर तब जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर अस्थिरता बनी हुई है, जो भारत के कच्चे तेल और LNG आयात का करीब आधा हिस्सा संभालता है।
एनालिस्ट्स की राय और बाजार का रुख
हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स जैसे गौरव शर्मा (Globe Capital) का मानना है कि ₹270 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट का काम कर सकता है और मौजूदा गिरावट को लंबी अवधि के निवेश के मौके के तौर पर देखा जा सकता है। वहीं, दूसरी ओर, जियोपॉलिटिकल जोखिमों को देखते हुए बाजार में फिलहाल सतर्कता का माहौल है।
आगे क्या?
कतर एनर्जी के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि एक ही सप्लायर पर अत्यधिक निर्भरता कितनी खतरनाक हो सकती है। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की स्थिति में सप्लाई में और लंबी रुकावटें आ सकती हैं, जिससे इंपोर्ट कॉस्ट भी बढ़ सकता है। Petronet LNG सीधे तौर पर कतर पर निर्भर है, जो इसे बाहरी झटकों के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनाता है। आगे चलकर Petronet LNG का भविष्य मध्य पूर्व में तनाव कम होने और ऊर्जा प्रवाह की स्थिरता पर काफी हद तक निर्भर करेगा। फिलहाल, बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है क्योंकि निवेशक इस फोर्स मेज्योर घटना के असर का आकलन कर रहे हैं।