Petronet LNG अब अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है। कंपनी साल 2028 से शुरू होने वाले 20 साल के नए कॉन्ट्रैक्ट के तहत QatarEnergy से अमेरिकी LNG मंगाने पर बातचीत कर रही है। हालांकि कंपनी का प्रॉफिट **53%** बढ़ा है, लेकिन निवेशकों की नजर पेंडिंग आर्बिट्रेशन केस और **90** रुकी हुई कार्गो शिपमेंट पर भी टिकी है।
सप्लाई चेन में सुरक्षा का दांव
भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए Petronet LNG अपनी सप्लाई चेन को डायवर्सिफाई कर रही है। कंपनी चाहती है कि साल 2028 से शुरू होने वाले लंबे कॉन्ट्रैक्ट में अमेरिका से आने वाली LNG (Liquefied Natural Gas) को शामिल किया जाए। कतर की Cheniere Energy और Woodside Energy जैसी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप का फायदा उठाकर Petronet बिना कतर से अपने पुराने रिश्तों को खराब किए, अपनी सप्लाई में एक भौगोलिक सुरक्षा कवच (Geographic Buffer) जोड़ना चाहती है।
यह कदम इसलिए भी जरूरी है क्योंकि मार्च 2026 से ही कंपनी को सप्लाई चेन की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मिडल ईस्ट में जारी तनाव, खासकर 'Strait of Hormuz' में हो रही बाधाओं के कारण कंपनी की करीब 90 कार्गो शिपमेंट अभी भी पेंडिंग हैं।
फाइनेंशियल हेल्थ पर एक नजर
सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही के नतीजे मिले-जुले रहे हैं। कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट ₹1,235.40 करोड़ रहा है, जो पिछले साल के मुकाबले 53% ज्यादा है। हालांकि, ऑपरेशंस से होने वाली रेवेन्यू 35% गिरकर ₹7,200.35 करोड़ पर आ गई है। इससे साफ है कि रेवेन्यू पर दबाव है, लेकिन कंपनी ने अपने इंटरनल एफिशिएंसी को बेहतर कर मुनाफा बचाया है।
निवेशकों के लिए रिस्क फैक्टर्स
निवेशकों को कंपनी के लीगल और ऑपरेशनल रिस्क को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कंपनी अभी वेसल मालिकों के साथ ₹625.42 करोड़ (प्लस टैक्स) के आर्बिट्रेशन केस में उलझी हुई है। इसके अलावा, कंपनी को अपने ग्राहकों से 'Use or Pay' ऑब्लिगेशन्स से जुड़े रिस्क का भी सामना करना पड़ता है। फिलहाल, निवेशकों को आर्बिट्रेशन केस के निपटारे और नए कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े अपडेट्स पर नजर रखनी चाहिए।
