Petronet LNG के बोर्ड में बड़े बदलाव की तैयारी
Petronet LNG Limited ने अपने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में दो नए सदस्यों को शामिल करने के लिए शेयरहोल्डर्स की मंजूरी लेने हेतु पोस्टल बैलेट की शुरुआत कर दी है। यह कदम कंपनी के बोर्ड की संरचना में बदलाव का संकेत देता है।
कब तक चलेगी वोटिंग?
यह अहम फैसला लेने के लिए रिमोट ई-वोटिंग प्रक्रिया लगभग 30 दिनों तक चलेगी, जो 6 मार्च, 2026 को सुबह 9:00 बजे IST से शुरू होकर 4 अप्रैल, 2026 को शाम 5:00 बजे IST पर समाप्त होगी।
कौन होंगे नए डायरेक्टर्स?
प्रस्तावित नियुक्तियों में श्री नीरज मित्तल शामिल हैं, जो डायरेक्टर और चेयरमैन के पद पर नियुक्त होंगे। वहीं, सुश्री अवंतिका सिंह औलख GMB/GoG के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली नॉमिनी डायरेक्टर के तौर पर बोर्ड में जगह पाएंगी। शेयरहोल्डर्स इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से रिमोट ई-वोटिंग सिस्टम के जरिए अपना वोट डाल सकते हैं। वोटिंग के लिए पात्रता की कट-ऑफ तारीख 27 फरवरी, 2026 निर्धारित की गई थी।
नतीजों का इंतजार
कंपनी से उम्मीद है कि वह इस पोस्टल बैलेट के नतीजे 7 अप्रैल, 2026 तक घोषित कर देगी।
क्यों है यह अहम?
यह नियुक्तियाँ Petronet LNG के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की संरचना को नया रूप देंगी। भारत की ऊर्जा सुरक्षा के बुनियादी ढांचे में एक महत्वपूर्ण इकाई के रूप में, बोर्ड की संरचना रणनीतिक निर्णय लेने, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और कंपनी की भविष्य की दिशा तय करने के लिए महत्वपूर्ण है।
जानिए कौन हैं नीरज मित्तल और अवंतिका सिंह?
श्री नीरज मित्तल 1992 बैच के एक प्रतिष्ठित भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं और वर्तमान में नवंबर 2025 से पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें जनवरी 2026 में Petronet LNG के बोर्ड में निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था।
सुश्री अवंतिका सिंह औलख 2003 बैच की गुजरात कैडर की IAS अधिकारी हैं और गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (GSPC) की मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। उन्हें दिसंबर 2025 में Petronet LNG के बोर्ड में नॉमिनी डायरेक्टर (GoG/GMB) के रूप में नामित किया गया था।
आगे क्या देखें?
आगे निवेशकों को पोस्टल बैलेट के नतीजों पर नजर रखनी चाहिए, जो प्रस्तावित डायरेक्टर्स की औपचारिक नियुक्ति तय करेंगे। 7 अप्रैल, 2026 तक नतीजों की आधिकारिक घोषणा पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके बाद नए बोर्ड सदस्यों के प्रभाव से कंपनी के रणनीतिक निर्णयों और नीतियों में बदलाव देखे जा सकते हैं।
