Petronet LNG ने Gruner Renewable Energy के साथ मिलकर **₹1,200 करोड़** के जॉइंट वेंचर का ऐलान किया है। इस साझेदारी के तहत कंपनी **10** कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट लगाएगी, ताकि ग्लोबल LNG मार्केट पर अपनी निर्भरता को कम किया जा सके।
बायोगैस में पेट्रोनेट की नई एंट्री
Petronet LNG अब रिन्यूएबल गैस मार्केट में अपनी जगह बनाने की तैयारी में है। कंपनी ने Gruner Renewable Energy के साथ 50:50 की हिस्सेदारी वाला जॉइंट वेंचर फाइनल किया है। यह कदम कंपनी के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि अब तक कंपनी का मुख्य फोकस पूरी तरह से ग्लोबल LNG इंपोर्ट पर रहा है।
क्यों लिया यह फैसला?
इंपोर्ट बिजनेस में आ रही चुनौतियों ने कंपनी को यह रास्ता अपनाने पर मजबूर किया है। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में कंपनी के Dahej टर्मिनल का थ्रूपुट घटकर 192 ट्रिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट्स रह गया, जो पिछले साल इसी दौरान 207 ट्रिलियन यूनिट्स था। ग्लोबल लेवल पर गैस सप्लाई चेन में भू-राजनीतिक तनाव और कीमतों में उतार-चढ़ाव कंपनी के बिजनेस मॉडल के लिए बड़ा रिस्क बन गए हैं। अब बायोगैस के जरिए कंपनी खुद को इस तरह के ग्लोबल झटकों से सुरक्षित (Hedge) करना चाहती है।
सरकार के नियमों का असर
सरकारी मैंडेट्स भी इस फैसले के पीछे एक बड़ी वजह हैं। अब सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए CNG और पाइप गैस में बायोगैस को ब्लेंड करना अनिवार्य हो गया है। FY27 में 3% से शुरू होकर यह टारगेट FY29 तक 5% तक पहुंच जाएगा। प्रस्तावित 10 CBG प्लांट से रोजाना करीब 180 टन गैस उत्पादन की उम्मीद है, यानी साल भर में 63,000 टन। हालांकि यह भारत के कुल 25.5 मिलियन टन LNG इंपोर्ट के मुकाबले कम है, लेकिन यह ब्लेंडिंग नियमों के अनुपालन के लिए एक जरूरी कदम है।
ऑपरेशनल रिस्क और वित्तीय चुनौतियां
वेस्ट-टू-एनर्जी मॉडल के अपने ऑपरेशनल रिस्क हैं। कंपनी को लंबे समय तक कृषि और ऑर्गेनिक वेस्ट की स्थिर सप्लाई चेन बनाए रखनी होगी। साथ ही, निवेशकों को यह भी देखना होगा कि कंपनी अपना बाकी कैपिटल एक्सपेंडिचर कैसे मैनेज करती है। फिलहाल, कंपनी Dahej में ₹20,685 करोड़ का पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स और ₹6,355 करोड़ की लागत से Gopalpur LNG टर्मिनल बना रही है। कंपनी का लक्ष्य अपनी कुल रिगैसीफिकेशन कैपेसिटी को 32.5 मिलियन टन सालाना तक पहुंचाना है, ऐसे में बैलेंस शीट पर इन बड़े खर्चों का असर देखना महत्वपूर्ण होगा।
