Petrol Pump: डीलर्स का मार्जिन बढ़ाने और UPI फीस हटाने की मांग, क्या बंद हो जाएंगे पेमेंट?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Petrol Pump: डीलर्स का मार्जिन बढ़ाने और UPI फीस हटाने की मांग, क्या बंद हो जाएंगे पेमेंट?

पेट्रोल पंप मालिक मार्जिन में बदलाव और नई UPI ट्रांजैक्शन फीस से छूट की मांग कर रहे हैं। डीलर्स का कहना है कि बढ़ती ऑपरेशनल कॉस्ट की वजह से बिजनेस चलाना मुश्किल हो गया है और वे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के खिलाफ खड़े हो गए हैं।

देश भर के पेट्रोल पंप ऑपरेटरों ने, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया पेट्रोलियम ट्रेडर्स (FAIPT) के नेतृत्व में, डीलर मार्जिन को पूरी तरह से बदलने की मांग तेज कर दी है। ईंधन क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है क्योंकि ऑपरेटर ₹2 लाख की मासिक आय और ₹2,000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर लगने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से पूर्ण छूट मांग रहे हैं।

विवाद की जड़ क्या है?

हालांकि अक्टूबर 2024 में डीलर मार्जिन में संशोधन किया गया था, लेकिन डीलर्स का तर्क है कि 2017 के बाद से बढ़ी हुई अनुपालन (Compliance) और ऑपरेशनल लागत को इसमें शामिल नहीं किया गया। सबसे बड़ा विवाद 15 अक्टूबर 2026 से लागू ₹2,000 से अधिक के UPI फ्यूल ट्रांजैक्शन पर ₹5 की फ्लैट MDR फीस को लेकर है। डीलर्स का कहना है कि यह फीस उनके पहले से ही कम मार्जिन को पूरी तरह खत्म कर रही है।

छोटे पंपों पर भारी संकट

आंकड़े बताते हैं कि 80% से ज्यादा रिटेल आउटलेट्स हर महीने 100 किलोलीटर से कम ईंधन बेचते हैं। इन छोटे ऑपरेटरों के लिए 24 घंटे की सेवाएं देना, लेबर कोड के नियमों का पालन करना, और बिजली-मेंटेनेंस का खर्च उठाना एक बड़ा बोझ बन गया है।

OMCs का रुख और सप्लाई का खतरा

ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) अब तक इन मांगों को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। वे अक्सर मार्जिन विवादों को मार्केटिंग अनुशासन दिशा-निर्देशों (MDG) के पालन से जोड़ देती हैं। अब स्थिति यह है कि अगर पेट्रोल पंप मालिकों की सरकार और OMCs के साथ बातचीत विफल रहती है, तो वे ₹2,000 से ज्यादा के डिजिटल पेमेंट लेना बंद कर सकते हैं। इससे देशभर में ईंधन की आपूर्ति और डिजिटल पेमेंट सिस्टम दोनों पर बुरा असर पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.