Pace Digitek को ₹1,775 करोड़ की बड़ी डील! कर्नाटक में बनेगा 250 MW सोलर+बैटरी स्टोरेज प्लांट

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AuthorMehul Desai|Published at:
Pace Digitek को ₹1,775 करोड़ की बड़ी डील! कर्नाटक में बनेगा 250 MW सोलर+बैटरी स्टोरेज प्लांट
Overview

Pace Digitek Limited के शेयरधारकों के लिए अच्छी खबर है! कंपनी ने कर्नाटक रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट लिमिटेड (KREDL) से **₹1,775 करोड़** का एक बड़ा प्रोजेक्ट हासिल किया है। इस प्रोजेक्ट में **250 MWAC** का सोलर पावर प्लांट और **250 MW/1100 MWh** की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) शामिल है।

🚀 बड़ी डील से Pace Digitek का दबदबा बढ़ा

Pace Digitek Limited ने भारतीय रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अपनी धाक जमा दी है। कंपनी को कर्नाटक रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट लिमिटेड (KREDL) से एक बड़ा प्रोजेक्ट मिला है, जो इसके भविष्य के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

क्या है ये प्रोजेक्ट?

यह प्रोजेक्ट कर्नाटक के पावागडा सोलर पार्क में स्थापित किया जाएगा। इसमें 250 MWAC की क्षमता वाला सोलर फोटोवोल्टेइक (PV) प्लांट लगेगा, जिसके साथ 250 MW/1100 MWh की हाई-कैपेसिटी बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) भी जोड़ी जाएगी। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत (GST सहित) ₹1,775 करोड़ है।

कब और कैसे होगा काम?

Power Purchase Agreement (PPA) और Battery Energy Storage Purchase Agreement (BESPA) पर हस्ताक्षर के 18 महीनों के भीतर इस प्रोजेक्ट को चालू करने का लक्ष्य है। एक बार चालू होने के बाद, यह प्लांट अगले 25 सालों तक ₹5.51 प्रति यूनिट के फिक्स्ड टैरिफ पर बिजली की सप्लाई करेगा, जिससे कंपनी को लॉन्ग-टर्म रेवेन्यू की गारंटी मिलेगी।

BESS का क्या महत्व है?

इस प्रोजेक्ट में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) का जुड़ाव इसे और भी खास बनाता है। आजकल ग्रिड को स्टेबल रखने, फ्रीक्वेंसी को रेगुलेट करने और सोलर जैसे रुक-रुक कर चलने वाले रिन्यूएबल सोर्स को इंटीग्रेट करने के लिए BESS बहुत ज़रूरी हो गया है। इस तरह के इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट को हासिल करके Pace Digitek ने कॉम्प्लेक्स और आधुनिक रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस देने की अपनी क्षमता को साबित किया है।

आगे की राह और चुनौतियाँ

यह डील Pace Digitek के लिए एक बड़ा बूस्ट है, लेकिन एग्जीक्यूशन टाइमलाइन पर नज़र रखना ज़रूरी है। PPA साइन होने के बाद 18 महीने का वक्त एफिशिएंट प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और सप्लाई चेन कोऑर्डिनेशन की मांग करता है। किसी भी देरी से प्रोजेक्ट के फाइनेंसियल रैंप-अप पर असर पड़ सकता है। फिक्स्ड टैरिफ के बावजूद, अगले 25 सालों में रेगुलेटरी बदलाव या ऑपरेशनल कॉस्ट में बढ़ोतरी का असर मुनाफे पर पड़ सकता है। हालांकि, यह प्रोजेक्ट Pace Digitek की यूटिलिटी-स्केल सोलर प्रोजेक्ट बनाने की काबिलियत और एनर्जी स्टोरेज में उसके स्ट्रैटेजिक मूव को दर्शाता है। यह भारत के महत्वाकांक्षी रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों और विश्वसनीय ग्रीन पावर की बढ़ती मांग के अनुरूप है।

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