भारत के LNG इम्पोर्ट में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सितंबर **2026** में ओमान ने **27%** मार्केट हिस्सेदारी के साथ भारत का टॉप LNG सप्लायर बनने का गौरव हासिल किया है, जबकि कतर की हिस्सेदारी घटकर महज **4.3%** रह गई है। इस उथल-पुथल के चलते भारत का कुल LNG इम्पोर्ट **14%** गिरकर **2.17 मिलियन टन** पर आ गया है।
भारत के ऊर्जा आयात (Energy Import) समीकरण में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। आंकड़ों के मुताबिक, ओमान ने 27% की हिस्सेदारी के साथ बाजार में पहली जगह बना ली है। इसके चलते अमेरिका अब खिसककर तीसरे पायदान पर पहुंच गया है, जिसकी हिस्सेदारी 16% रही, जबकि नाइजीरिया ने दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। यह भारत की बदलती ऊर्जा रणनीति और सप्लाई चेन की विविधता को दर्शाता है।
कतर में क्यों आई गिरावट?
कतर, जो ऐतिहासिक रूप से भारत को 45% तक LNG सप्लाई करता था, उसकी हिस्सेदारी का 4.3% तक गिरना चिंताजनक है। इसका मुख्य कारण 'Ras Laffan Industrial City' में हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर डैमेज है। साल 2026 की शुरुआत में हुई सुरक्षा घटनाओं के बाद से वहां से सप्लाई चेन बाधित है, जिसका सीधा असर भारत के कुल आयात पर पड़ा है।
घरेलू उद्योगों पर क्या होगा असर?
नेचुरल गैस का उपयोग खाद (Fertilizer) निर्माण और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में बड़े पैमाने पर होता है। सप्लाई में कमी और महंगे विकल्पों की तरफ झुकाव से इन कंपनियों के ऑपरेटिंग कॉस्ट में बढ़ोतरी का जोखिम है। कच्चे तेल के मुकाबले LNG मार्केट लंबे समय के इंफ्रास्ट्रक्चर और शिपिंग लेन पर निर्भर है। हॉरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री अस्थिरता अभी भी भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा रिस्क बनी हुई है। निवेशक अब कतर की रिकवरी टाइमलाइन पर नजरें टिकाए बैठे हैं, क्योंकि इसका असर गैस आधारित कंपनियों के मार्जिन पर पड़ना तय है।
