सप्लाई का बड़ा खेल: ओमान आगे, कतर पीछे
गल्फ देशों में जारी तनाव और युद्ध के कारण भारत के ऊर्जा आयात में एक बड़ा बदलाव आया है। जहां कतर (Qatar) लंबे समय से भारत को LNG सप्लाई में सबसे आगे रहा है, वहीं इस बार ओमान (Oman) ने बाजी मार ली है। मार्च में ओमान ने भारत को कुल आयातित 1.63 मिलियन टन LNG में से 489,000 टन की सप्लाई की, जो कुल मार्केट शेयर का लगभग 30% है। इसके मुकाबले, कतर की हिस्सेदारी घटकर सिर्फ 8% रह गई है, जबकि पहले यह औसतन 41% हुआ करती थी।
सप्लाई चेन पर मंडराता खतरा
युद्ध की वजह से कतर के प्रमुख LNG एक्सपोर्ट हब रास लफ्तान (Ras Laffan) पर हमले और जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से कतर का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ओमान की भौगोलिक स्थिति, जो फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से उतनी नहीं जुड़ी है, उसे एक रणनीतिक बढ़त मिली है।
Petronet LNG की नई रणनीति
भारत के बड़े LNG खरीदार, जैसे Petronet LNG, अब इस क्षेत्रीय अस्थिरता से बचने के लिए अपनी सप्लाई को डायवर्सिफाई कर रहे हैं। कंपनी अफ्रीकी देशों जैसे नाइजीरिया, सेनेगल और कांगो के साथ-साथ अमेरिका से भी LNG का आयात बढ़ा रही है। यह कदम सिर्फ एक अस्थायी समाधान नहीं, बल्कि आने वाले लंबे समय के लिए एक रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि जानकारों का मानना है कि गल्फ क्षेत्र में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत में महीनों या साल लग सकते हैं।
सप्लाई में अस्थिरता का जोखिम
हालांकि, इस बदलाव से Petronet LNG जैसी कंपनियों के लिए नए जोखिम भी पैदा हो गए हैं। वैकल्पिक सप्लायर्स से LNG मंगवाने में लॉजिस्टिक्स का खर्च बढ़ सकता है, जिससे कंपनी के मार्जिन पर दबाव आ सकता है। साथ ही, शॉर्ट-टर्म स्पॉट मार्केट पर निर्भरता से कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव का खतरा भी बना रहेगा, जो कि पहले के लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स से बिल्कुल अलग है।
