Ola Electric ने अपना 'शक्ति' बैटरी एनर्जी स्टोरेज पोर्टफोलियो लॉन्च कर दिया है। यह कदम कंपनी के इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के अलावा नए रेवेन्यू सोर्स बनाने की रणनीति का हिस्सा है, लेकिन निवेशकों की नज़र कंपनी के लगातार हो रहे नुकसान और ऑडिटर की चिंताओं पर भी है।
Ola Electric का एनर्जी सेक्टर में बड़ा कदम
Ola Electric ने आधिकारिक तौर पर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) मार्केट में कदम रख दिया है। कंपनी ने अपना नया 'शक्ति' पोर्टफोलियो लॉन्च किया है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के मुख्य बिज़नेस से आगे बढ़कर घरों, कमर्शियल जगहों और बड़े उद्योगों के लिए एनर्जी स्टोरेज समाधान पेश करेगा। कंपनी अपनी इन-हाउस लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) सेल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके भारत के बढ़ते एनर्जी स्टोरेज इकोसिस्टम में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही है।
'शक्ति' पोर्टफोलियो: तीन खास रेंज
'शक्ति' रेंज को तीन अलग-अलग सेगमेंट के लिए डिजाइन किया गया है। 'शक्ति Gen2' घरों के लिए है, जिससे सोलर एनर्जी को स्टोर किया जा सकेगा। 'शक्ति Rack' कमर्शियल ग्राहकों के लिए है, जबकि 'महाशक्ति' प्लेटफॉर्म बड़े उद्योगों और यूटिलिटी-स्केल प्रोजेक्ट्स के लिए बनाया गया है। इस लॉन्च के साथ, Ola Electric ने Axis Energy के साथ एक एग्रीमेंट भी किया है, जिसके तहत 2032 तक 20 GWh तक के एनर्जी स्टोरेज सिस्टम तैनात किए जाएंगे। 2028 से सालाना 5 GWh की क्षमता का लक्ष्य रखा गया है।
वित्तीय चुनौती और ऑडिटर की चिंताएं
यह विस्तार Ola Electric के लिए नए रेवेन्यू स्ट्रीम बनाने का एक बड़ा प्रयास है, लेकिन कंपनी के सामने कई चुनौतियां हैं। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में, Ola Electric ने ₹455 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया। हालांकि, कंपनी अपने नेट लॉस को घटाकर ₹336 करोड़ करने में सफल रही (पिछले साल इसी अवधि में ₹428 करोड़ था), लेकिन बिज़नेस अभी भी घाटे में है और लगातार कैश बर्न हो रहा है। एनर्जी स्टोरेज जैसे नए मैन्युफैक्चरिंग वर्टिकल को स्केल करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत होगी, जिससे कंपनी की बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ सकता है।
निवेशक कंपनी के गवर्नेंस और कंप्लायंस पर भी नजर रख रहे हैं। कंपनी के ऑडिटर ने लेटेस्ट क्वार्टरली रिव्यू में फाइनेंसियल स्टेटमेंट्स पर क्वालिफिकेशन (योग्यता) दी है। यह क्वालिफिकेशन प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) पेनल्टी से संबंधित ₹57 करोड़ के प्रोविज़न को रिवर्स करने के कारण आई है। ऑडिटर ने कहा है कि इस रिवर्सल को सरकार से औपचारिक मंजूरी के बिना दर्ज किया गया था। शेयरधारकों के लिए ऐसी क्वालिफिकेशन्स महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये कंपनी और उसके ऑडिटर के बीच अकाउंटिंग की व्याख्या में अंतर को दर्शा सकती हैं।
'शक्ति' पोर्टफोलियो की सफलता कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग को स्केल करने, बड़े कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने और एनर्जी सेक्टर के कॉम्पिटिटिव माहौल को मैनेज करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। निवेशकों के लिए मुख्य बातें ये होंगी कि वादा की गई 20 GWh स्टोरेज कैपेसिटी कब तक चालू होती है, ऑपरेशनल नुकसान का प्रबंधन कैसे होता है, और PLI पेनल्टी जैसे रेगुलेटरी प्रोविज़न्स पर मैनेजमेंट का क्या रुख रहता है।
