हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में जो तेजी देखने को मिली है, उसकी मुख्य वजह मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है।
एक तरफ, ईरानी पानी के पास जहाजों को लेकर अमेरिकी चेतावनी और लगातार कूटनीतिक हलचल ने ऑयल बेंचमार्क में एक बड़ा रिस्क प्रीमियम (Risk Premium) जोड़ दिया है। इस वजह से WTI $64 प्रति बैरल के ऊपर और ब्रेंट क्रूड $69 के करीब कारोबार कर रहा है।
लेकिन, यह सब तब हो रहा है जब बाजार के फंडामेंटल्स (Fundamentals) एक अलग ही कहानी कह रहे हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि 2026 में ग्लोबल ऑयल डिमांड ग्रोथ केवल 9,30,000 बैरल प्रति दिन रहेगी, जबकि दुनिया की ऑयल सप्लाई 25 लाख बैरल प्रति दिन बढ़ सकती है। इसका मतलब है कि 36.9 लाख बैरल प्रति दिन का भारी सरप्लस (Surplus) पैदा हो सकता है। यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) भी 2026 में ब्रेंट क्रूड के दाम $56 प्रति बैरल रहने का अनुमान लगा रहा है, जो मौजूदा स्तरों से काफी कम है। OPEC+ ने भी फरवरी-मार्च 2026 के लिए अपने प्रोडक्शन लेवल को स्थिर रखने का फैसला किया है, यानी सप्लाई कम करने का कोई तत्काल कदम नहीं दिख रहा।
एनर्जी सेक्टर की बात करें तो, बड़ी कंपनियों जैसे ExxonMobil (XOM) का P/E रेशियो लगभग 21.22-22.3 और मार्केट कैप $615-637 बिलियन है। वहीं, Chevron (CVX) का P/E रेशियो थोड़ा ज्यादा, लगभग 25.3-27.36 है और मार्केट कैप $360-367 बिलियन। XOM का P/E अपने साथियों से कम है, जबकि CVX का P/E तीन साल के हाई के करीब है। एनर्जी सेलेक्ट सेक्टर SPDR फंड (XLE) ने इस साल 18.16% और पिछले साल 18.53% का रिटर्न दिया है। लेकिन, इसका RSI 73.78 पर है, जो बताता है कि यह सेक्टर ETF ओवरबॉट (Overbought) जोन में पहुंच रहा है।
असल में, कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी शायद भू-राजनीतिक सुर्खियों से ज़्यादा प्रभावित है, जो असली फंडामेंटल्स को छिपा रही है। ऐतिहासिक तौर पर भी ईरान से जुड़े तनावों पर कीमतों में उछाल आया, लेकिन बाद में ये स्थिर हो गईं। 2026 के लिए अनुमानित बड़ा ग्लोबल ऑयल सरप्लस यह बताता है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव कम हुए, तो कीमतें मौजूदा ऊंचे स्तरों को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर सकती हैं। कमजोर होता US डॉलर इंडेक्स (DXY) आमतौर पर कमोडिटी को सहारा देता है, लेकिन अगर सप्लाई की चिंताएं खत्म हुईं तो यह मैक्रो टेलविंड (Macro Tailwind) भी शायद काम न आए। J.P. Morgan और Goldman Sachs जैसे एनालिस्ट्स का भी मानना है कि 2026 में ब्रेंट क्रूड औसतन $50 के मध्य में रहेगा, जो मौजूदा स्तरों से काफी नीचे है। डिमांड ग्रोथ की स्थिरता पर भी सवाल हैं, क्योंकि IEA के मुताबिक यह मुख्य रूप से नॉन-OECD देशों से आ रही है।
कुल मिलाकर, विश्लेषकों का मानना है कि 2026 में तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है, और ब्रेंट क्रूड $50 के मध्य से उच्च स्तर पर रह सकता है। यह मौजूदा भू-राजनीतिक प्रीमियम के कारण बने स्तरों से बिल्कुल अलग होगा। कुछ कंपनियों पर भरोसा कायम है, जैसे Wolfe Research ने ExxonMobil पर 'Outperform' रेटिंग और $140 का टारगेट प्राइस दिया है। वहीं, Chevron के लिए विश्लेषकों का 'Hold' कंसेंसस है और टारगेट प्राइस $183.84। ऐसे में, यह देखना होगा कि मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक हालात कितनी देर तक कीमतों को ऊपर रखते हैं, या फिर सप्लाई का बढ़ता स्तर हावी होता है।