मिडिल ईस्ट में टेंशन, कच्चा तेल $100 के पार! ONGC और Oil India के शेयरों में बंपर तेजी, निवेशकों की चांदी!

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AuthorMehul Desai|Published at:
मिडिल ईस्ट में टेंशन, कच्चा तेल $100 के पार! ONGC और Oil India के शेयरों में बंपर तेजी, निवेशकों की चांदी!
Overview

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में रुकावटों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी है। इस वजह से, ONGC और Oil India जैसी भारतीय कंपनियों का रेवेन्यू (Revenue) ज़बरदस्त बढ़ने वाला है। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) **$100** प्रति बैरल के पार निकल गया है, जो इन कंपनियों के लिए बड़ी खुशखबरी है।

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मिडिल ईस्ट टेंशन का सीधा असर

अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) का सीधा असर कच्चे तेल के बाज़ार पर दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल सप्लाई में संभावित बाधाओं की आशंका ने वैश्विक स्तर पर कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। ब्रेंट क्रूड के फ्यूचर्स (Futures) $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गए हैं, और अगर यह टेंशन बढ़ती रही तो कीमतें $120 से $150 तक भी जा सकती हैं। हाल के दिनों में कीमतों में 40% से ज़्यादा की तेज़ी आई है, जो पिछले $65 के औसत से काफी ज़्यादा है।

ONGC और Oil India के लिए बंपर कमाई का मौका

इस बढ़ोतरी का सीधा फायदा भारतीय सरकारी तेल कंपनियों, ONGC और Oil India को मिल रहा है। ONGC, जो देश के कुल कच्चे तेल उत्पादन का 65% से ज़्यादा हिस्सा अकेले बनाती है, उसके शेयर अपने 52-हफ्ते के हाई (52-week high) के करीब कारोबार कर रहे हैं। वहीं, दूसरी सबसे बड़ी सरकारी उत्पादक Oil India के शेयर भी नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए हैं और हाल ही में करीब 10% का उछाल दिखा चुके हैं।

ONGC की मार्केट वैल्यू (Market Value) करीब ₹3.58 ट्रिलियन है और इसका P/E रेशियो 9.38 है, जो पिछले 10 सालों के औसत से 29% ऊपर है। Oil India का मार्केट कैप लगभग ₹770-₹785 बिलियन के आसपास है, जिसका P/E 13.47 है। एनालिस्ट्स (Analysts) इन शेयरों पर काफी बुलिश (Bullish) हैं और ONGC के लिए 20% से ज़्यादा के अपसाइड (Upside) वाले टारगेट प्राइस (Target Price) दे रहे हैं। इतिहास बताता है कि ऐसी जियोपॉलिटिकल क्राइसिस (Geopolitical Crisis) में ये शेयर 5-15% तक बढ़ सकते हैं, और अभी भी इन शेयरों में 3-4% या उससे ज़्यादा की तेज़ी देखी जा रही है।

भारत के लिए क्या हैं रिस्क?

हालांकि, 90% से ज़्यादा तेल इम्पोर्ट (Import) करने वाले भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक भी है। कच्चे तेल के दामों में हर $10 की बढ़ोतरी से महंगाई (Inflation) में करीब 0.5% का इजाफा हो सकता है। साथ ही, देश का ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) भी बढ़ने की आशंका है।

लगातार ऊंची कीमतों से वैश्विक मांग (Demand) कम हो सकती है और इकोनॉमिक स्लोडाउन (Economic Slowdown) का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में, भारत सरकार प्रोड्यूसर्स पर विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) लगा सकती है, जैसा कि पहले भी हो चुका है। रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) और वेदांता (Vedanta) जैसी प्राइवेट कंपनियाँ भी इस सेक्टर में हैं।

लंबे समय में, दुनिया भर में क्लीन एनर्जी (Clean Energy) की ओर बढ़ते रुझान के चलते Oil India जैसी कंपनियाँ ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) जैसे प्रोजेक्ट्स में भी निवेश कर रही हैं। फिलहाल, तेल की कीमतों का भविष्य भू-राजनीतिक स्थिति, वैश्विक अर्थव्यवस्था और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.