मिडिल ईस्ट टेंशन का सीधा असर
अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) का सीधा असर कच्चे तेल के बाज़ार पर दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल सप्लाई में संभावित बाधाओं की आशंका ने वैश्विक स्तर पर कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। ब्रेंट क्रूड के फ्यूचर्स (Futures) $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गए हैं, और अगर यह टेंशन बढ़ती रही तो कीमतें $120 से $150 तक भी जा सकती हैं। हाल के दिनों में कीमतों में 40% से ज़्यादा की तेज़ी आई है, जो पिछले $65 के औसत से काफी ज़्यादा है।
ONGC और Oil India के लिए बंपर कमाई का मौका
इस बढ़ोतरी का सीधा फायदा भारतीय सरकारी तेल कंपनियों, ONGC और Oil India को मिल रहा है। ONGC, जो देश के कुल कच्चे तेल उत्पादन का 65% से ज़्यादा हिस्सा अकेले बनाती है, उसके शेयर अपने 52-हफ्ते के हाई (52-week high) के करीब कारोबार कर रहे हैं। वहीं, दूसरी सबसे बड़ी सरकारी उत्पादक Oil India के शेयर भी नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए हैं और हाल ही में करीब 10% का उछाल दिखा चुके हैं।
ONGC की मार्केट वैल्यू (Market Value) करीब ₹3.58 ट्रिलियन है और इसका P/E रेशियो 9.38 है, जो पिछले 10 सालों के औसत से 29% ऊपर है। Oil India का मार्केट कैप लगभग ₹770-₹785 बिलियन के आसपास है, जिसका P/E 13.47 है। एनालिस्ट्स (Analysts) इन शेयरों पर काफी बुलिश (Bullish) हैं और ONGC के लिए 20% से ज़्यादा के अपसाइड (Upside) वाले टारगेट प्राइस (Target Price) दे रहे हैं। इतिहास बताता है कि ऐसी जियोपॉलिटिकल क्राइसिस (Geopolitical Crisis) में ये शेयर 5-15% तक बढ़ सकते हैं, और अभी भी इन शेयरों में 3-4% या उससे ज़्यादा की तेज़ी देखी जा रही है।
भारत के लिए क्या हैं रिस्क?
हालांकि, 90% से ज़्यादा तेल इम्पोर्ट (Import) करने वाले भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक भी है। कच्चे तेल के दामों में हर $10 की बढ़ोतरी से महंगाई (Inflation) में करीब 0.5% का इजाफा हो सकता है। साथ ही, देश का ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) भी बढ़ने की आशंका है।
लगातार ऊंची कीमतों से वैश्विक मांग (Demand) कम हो सकती है और इकोनॉमिक स्लोडाउन (Economic Slowdown) का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में, भारत सरकार प्रोड्यूसर्स पर विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) लगा सकती है, जैसा कि पहले भी हो चुका है। रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) और वेदांता (Vedanta) जैसी प्राइवेट कंपनियाँ भी इस सेक्टर में हैं।
लंबे समय में, दुनिया भर में क्लीन एनर्जी (Clean Energy) की ओर बढ़ते रुझान के चलते Oil India जैसी कंपनियाँ ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) जैसे प्रोजेक्ट्स में भी निवेश कर रही हैं। फिलहाल, तेल की कीमतों का भविष्य भू-राजनीतिक स्थिति, वैश्विक अर्थव्यवस्था और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा।
