Crude Oil $100 के पार! इन Indian Stocks में प्रॉफिट बुकिंग, शेयर गिरे

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Crude Oil $100 के पार! इन Indian Stocks में प्रॉफिट बुकिंग, शेयर गिरे
Overview

कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई तेज़ी और $100 प्रति बैरल के करीब पहुंचने के कारण भारतीय शेयर बाजार में आज प्रॉफिट बुकिंग (Profit Booking) का दौर चला। US-Iran के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के चलते तेल की कीमतों में उछाल आया है। Hindustan Petroleum Corporation (HPCL), Bharat Petroleum Corporation (BPCL), Indian Oil Corporation (IOCL) जैसी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई, साथ ही Asian Paints जैसे पेंट निर्माताओं के शेयर भी दबाव में आए।

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कच्चे तेल का भू-राजनीतिक 'ताप'

आज भारतीय शेयर बाजार में तेल से जुड़ी कंपनियों में बिकवाली हावी रही। ग्लोबल मार्केट में Brent क्रूड ऑयल की कीमतें $98 प्रति बैरल के ऊपर निकल गईं और $100 के पार जाने की ओर बढ़ रही हैं। इसकी मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी ने सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

OMCs और पेंट कंपनियों पर सीधा असर

इस स्थिति का सीधा असर भारत की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) जैसे HPCL, BPCL और IOCL पर पड़ा है। कच्चे तेल के बढ़ते दाम सीधे तौर पर इनके इम्पोर्ट बिल और प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित करते हैं। नतीजतन, इन कंपनियों के शेयरों में 2% तक की गिरावट दर्ज की गई।

इसी के साथ, पेंट बनाने वाली कंपनियां जैसे Asian Paints भी दबाव में आ गईं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें इनके प्रोडक्शन कॉस्ट को बढ़ाती हैं, क्योंकि पेंट बनाने में कई डेरिवेटिव्स का इस्तेमाल होता है जो कच्चे तेल से बनते हैं। Asian Paints के शेयर करीब 1.7% गिरकर ₹2,500 के आसपास ट्रेड हुए।

भारत की अर्थव्यवस्था पर तेल का 'बोझ'

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है। ऐसे में, कच्चे तेल की कीमतें $95 प्रति बैरल से ऊपर बने रहने पर देश की अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

  • महंगाई (Inflation): बढ़ती तेल कीमतों से सीधे तौर पर महंगाई बढ़ने का खतरा है, जो पहले से ही 5.5% के करीब बनी हुई थी। इससे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के लिए महंगाई को काबू में रखना और मुश्किल हो जाएगा।
  • इम्पोर्ट बिल और रुपया: तेल आयात पर खर्च बढ़ेगा, जिससे देश का इम्पोर्ट बिल बढ़ेगा और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव आएगा। इससे भारतीय रुपये (Rupee) के कमजोर होने का भी खतरा है।
  • राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit): सरकार के लिए तेल सब्सिडी और अन्य खर्चे बढ़ सकते हैं, जिससे राजकोषीय घाटा टारगेट से ऊपर जा सकता है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए यह 5.1% पर लक्ष्य किया गया है।

शेयर बाजार में निवेशकों की रणनीति

HPCL के शेयर करीब ₹385 (P/E 12x), BPCL ₹318 (P/E 10x), और IOCL लगभग ₹148 (P/E 9x) के स्तर पर कारोबार कर रहे थे, इन सभी में एवरेज से ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम देखा गया। इससे पता चलता है कि निवेशक सतर्क हो गए हैं और इन स्टॉक्स से दूरी बना रहे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक $100 के पार बनी रहीं, तो यह भारतीय कंपनियों, खासकर OMCs और पेंट सेक्टर के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। OMCs के लिए सरकारी हस्तक्षेप का भी खतरा रहता है, जिससे उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है, जबकि पेंट कंपनियों को बढ़ती लागत और घटती कंज्यूमर डिमांड का सामना करना पड़ सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.