भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल का कनेक्शन
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव के गरमाने की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। इसका सीधा असर भारतीय तेल और गैस सेक्टर पर पड़ रहा है, जिससे इस सेक्टर के शेयरों में जोरदार उछाल आया है। Brent क्रूड ऑयल $68 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जबकि West Texas Intermediate (WTI) क्रूड $64 के पास ट्रेड कर रहा है। जनवरी की शुरुआत से इनमें 13% से ज़्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस तनाव के बीच, BSE ऑयल एंड गैस इंडेक्स आज इंट्रा-डे ट्रेड में करीब 2.4% चढ़ गया, जबकि BSE Sensex में 0.16% की मामूली गिरावट आई। यह इंडेक्स अपने 52-हफ्ते के हाई 29,249.06 के करीब कारोबार कर रहा है।
ONGC: वैल्यूएशन गैप और बड़ी डील
इस सेक्टर की एक बड़ी कंपनी Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) के शेयर की तेजी के पीछे सिर्फ कच्चे तेल की कीमतें ही नहीं, बल्कि उसका वैल्यूएशन गैप और स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप भी है। ONGC का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो अभी लगभग 8.83 है, जो कि ऑयल इंडस्ट्री के औसत 14.82 से काफी कम है। इसके अलावा, ONGC ने हाल ही में BP Plc के साथ वेस्टर्न ऑफशोर एसेट्स के लिए टेक्निकल सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर एक डील साइन की है। माना जा रहा है कि इस पार्टनरशिप से अगले 5 से 7 सालों में प्रोडक्शन में बड़ा बदलाव आ सकता है, और FY26 की चौथी तिमाही से इसके फायदे दिखने शुरू हो सकते हैं। BP, ONGC के प्रोडक्शन को 60% तक बढ़ाने में मदद कर सकती है।
OMCs की अपनी कहानी
वहीं, सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) जैसे Indian Oil Corporation (IOCL), Hindustan Petroleum Corporation (HPCL), और Bharat Petroleum Corporation (BPCL) के शेयर भी मजबूत हुए हैं। इनकी परफॉरमेंस में सुधार, LPG में घाटे में कमी और सरकार से मिलने वाले कॉम्पेंसेशन का बड़ा हाथ है। इन कंपनियों का P/E रेशियो, कंपनी के हिसाब से 6x से 17x के बीच है, जो उनके ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर फोकस को दर्शाता है।
एनालिस्ट्स की राय और मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर
एनालिस्ट्स ONGC को लेकर मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। ICICI Securities ने 'Buy' रेटिंग और ₹320 का टारगेट प्राइस (पहले ₹340) दिया है। वहीं, MarketsMOJO ने ONGC को 'Buy' से downgrade करके 'Hold' कर दिया है।
इस सेक्टर की तेजी के बावजूद, भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए मैक्रो इकोनॉमिक माहौल थोड़ा चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92 को पार कर गया है, जिससे इम्पोर्ट कॉस्ट बढ़ रही है और महंगाई बढ़ सकती है। वैश्विक स्तर पर भी उभरते बाजारों में निवेशक थोड़ा सतर्क दिख रहे हैं, जिससे गोल्ड और सिल्वर जैसे सेफ हेवन एसेट्स में मांग बढ़ी है। इन सबके बीच, ONGC जैसी कंपनियों के इंट्रिन्सिक वैल्यू और स्ट्रैटेजिक ग्रोथ की संभावनाएं निवेशकों के लिए एक बड़ा मौका पेश कर सकती हैं।
