गुरुवार को ऑयल और गैस सेक्टर (Oil & Gas Sector) ने बाज़ार में अपनी मजबूत पकड़ दिखाई। BSE Oil & Gas इंडेक्स 29,447.10 के अपने 52-हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया। यह तब हुआ जब ब्रॉडर BSE Sensex में 0.36% की गिरावट देखी गई। पिछले एक महीने में, ऑयल और गैस इंडेक्स ने 2.2% का रिटर्न दिया है, जबकि सेंसेक्स में 2.2% की गिरावट आई है।
क्रूड ऑयल की कीमतें बनीं तेजी का कारण
इस सेक्टर में आई इस तूफानी तेजी के पीछे की मुख्य वजह ग्लोबल क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में हुई बढ़ोतरी है। बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते सप्लाई बाधित होने की आशंकाओं से कीमतें उछलीं। साथ ही, EIA (Energy Information Administration) की रिपोर्ट में अमेरिकी क्रूड इन्वेंटरी में 35 लाख बैरल की कमी दर्ज होने से भी कीमतों को सहारा मिला। हालांकि, ओमान में कूटनीतिक बातचीत की ख़बरों से बाज़ार में थोड़ी स्थिरता आई, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिमों का प्रीमियम कीमतों को ऊपर रखता रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1 जनवरी 2026 को करीब $60 प्रति बैरल से शुरू होकर 28 जनवरी 2026 तक क्रूड ऑयल की कीमतें लगभग $67 प्रति बैरल तक पहुँच गईं।
स्टॉक्स में दिखी दमदार तेजी
कीमतों में इस बढ़ोतरी का सीधा फायदा इंडेक्स में शामिल कंपनियों को हुआ। Indian Oil Corporation, Hindustan Petroleum Corporation, और Bharat Petroleum Corporation जैसी कंपनियों के शेयरों में 1% से 3% तक की बढ़ोतरी देखी गई। अपस्ट्रीम सेक्टर की दिग्गज कंपनियों Oil India और ONGC (Oil and Natural Gas Corporation) ने भी शानदार रैली दिखाई, जहाँ Oil India के शेयर पिछले महीने 22% उछले, वहीं ONGC में 14% की तेजी आई।
एनालिस्ट्स की राय और आगे की राह
अब बात करते हैं इन कंपनियों के वैल्यूएशन (Valuation) की। ONGC फिलहाल लगभग 7.64 के P/E ratio पर ट्रेड कर रहा है, जिसका मार्केट कैप लगभग ₹3.38 ट्रिलियन है। वहीं, Oil India का P/E ratio करीब 11.8 है और मार्केट कैप लगभग ₹82,500 करोड़ है। तुलना करें तो Reliance Industries का P/E ratio लगभग 22-23x और मार्केट कैप करीब ₹21 ट्रिलियन के आसपास है, जो काफी बड़ा है। Indian Oil Corporation (IOCL) का P/E ratio लगभग 10.54 और मार्केट कैप करीब ₹2.44 ट्रिलियन है। Hindustan Petroleum (HPCL) का P/E ratio 6.23 और मार्केट कैप करीब ₹97,700 करोड़ है, जबकि Bharat Petroleum (BPCL) का P/E ratio 6.5 और मार्केट कैप लगभग ₹1.62 ट्रिलियन है। सेक्टर का औसत P/E ratio लगभग 16.65 है, जिससे पता चलता है कि ONGC और Oil India इस औसत के मुकाबले डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहे हैं।
एनालिस्ट्स (Analysts) की राय मिली-जुली है। उनका कहना है कि फिलहाल जियोपॉलिटिकल कारणों से शॉर्ट-टर्म में तेजी बनी रह सकती है। चीन में लूनर न्यू ईयर की छुट्टियों के बाद औद्योगिक मांग में नरमी आने की आशंका और OPEC+ द्वारा Q1 2026 तक उत्पादन पर रोक जारी रखने के फैसले से बाज़ार टाइट तो रहेगा, लेकिन मांग में धीमी वृद्धि की उम्मीद है। अनुमान है कि आने वाले हफ्तों में WTI क्रूड ऑयल $59–$66 प्रति बैरल के दायरे में रह सकता है, जो निवेशकों के लिए डिप-बाइंग (Dip-Buying) की रणनीति को बढ़ावा दे सकता है।
ONGC का पिछले साल का रिटर्न लगभग 4.22% रहा। एनालिस्ट्स ONGC और Oil India पर बुलिश (Bullish) हैं। 30 में से 18 एनालिस्ट ONGC को 'Buy' या 'Strong Buy' रेटिंग दे रहे हैं, जिनका कंसेंसस प्राइस टारगेट (Consensus Price Target) ₹276.58 है। इसी तरह, Oil India के लिए 23 में से 15 एनालिस्ट 'Strong Buy' की सलाह दे रहे हैं, जिनका कंसेंसस टारगेट ₹535.25 है।
हालांकि, इन बुलिश सिग्नल्स और पॉजिटिव टेक्निकल्स के बावजूद, बाज़ार के जानकार लॉन्ग-टर्म (Long-term) में क्रूड ऑयल की कीमतों को लेकर सतर्क बने हुए हैं। शॉर्ट-टर्म में जहां जियोपॉलिटिकल रिस्क और टेक्निकल्स सेक्टर को सहारा दे रहे हैं, वहीं मीडियम से लॉन्ग-टर्म में मांग (Demand) से जुड़ी चिंताओं और अन्य मैक्रो फैक्टर्स के कारण तेजी धीमी पड़ सकती है।
कुल मिलाकर, ऑयल और गैस सेक्टर फिलहाल शॉर्ट-टर्म की वोलैटिलिटी (Volatility) और जियोपॉलिटिकल संकेतों से लाभान्वित हो रहा है। लेकिन निवेशकों को लॉन्ग-टर्म के सिरदर्द जैसे डिमांड कंसर्न्स पर भी ध्यान देना होगा।
