Brent crude के दाम घटकर **$103.06** प्रति बैरल पर आ गए हैं। सऊदी अरब द्वारा सुरक्षा खतरों के बावजूद अपने एक्सपोर्ट रूट को सफलतापूर्वक बदलने के बाद सप्लाई को लेकर चिंताएं कम हुई हैं, जो भारतीय निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को नरमी देखी गई। Brent crude वायदा $103.06 प्रति बैरल और US West Texas Intermediate (WTI) $99.41 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। ट्रेडर्स अब सप्लाई चेन की स्थिरता को भू-राजनीतिक (geopolitical) तनावों से ऊपर रख रहे हैं।
एक्सपोर्ट में आई जबरदस्त रिकवरी
सऊदी अरब की सरकारी कंपनी Saudi Aramco ने Yanbu और Riyadh में हुए ड्रोन हमलों के बावजूद अपने ऑपरेशन्स को Strait of Hormuz के जरिए शिफ्ट करने में सफलता पाई है। डेटा के अनुसार, सितंबर में एक्सपोर्ट वॉल्यूम बढ़कर 40 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया है, जो अगस्त के 24 लाख बैरल के मुकाबले काफी ज्यादा है। इस चपलता (agility) ने तेल की कीमतों में बड़ी उछाल को फिलहाल रोक दिया है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए कीमतों में कोई भी हलचल सीधे तौर पर भारतीय रुपये और महंगाई पर असर डालती है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने पर इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (Indian Oil Corporation), भारत पेट्रोलियम (Bharat Petroleum) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (Hindustan Petroleum) जैसी कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आता है। ऐसे में कीमतों में कमी आना इन कंपनियों और मार्केट सेंटीमेंट के लिए अच्छी खबर है।
आगे क्या है नजर रखने वाली बात?
भले ही सप्लाई का संकट अभी टला हो, लेकिन डिप्लोमैटिक फ्रंट पर अनिश्चितता बरकरार है। अमेरिका और ईरान के बीच संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में संभावित बातचीत पर बाजार की नजरें टिकी हैं। निवेशकों को Red Sea और Persian Gulf जैसे अहम रास्तों पर नजर रखनी होगी, क्योंकि किसी भी तरह का व्यवधान फिर से कीमतों में तेजी ला सकता है।
