Oil India Limited की सब्सिडियरी, OIL Green Energy Limited ने हरियाणा की चार नगर पालिकाओं के साथ बड़ा करार किया है। इस प्रोजेक्ट के जरिए रोजाना **5,000 टन** कचरे का निपटारा कर बायोगैस और **50 मेगावाट** बिजली बनाई जाएगी, जिसका लक्ष्य **अक्टूबर 2028** तक पूरा करना है।
सरकारी कंपनी Oil India Limited की ग्रीन एनर्जी आर्म, OIL Green Energy Limited (OGEL) अब रिन्यूएबल सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। कंपनी ने हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, अंबाला और हिसार में कचरे से ऊर्जा बनाने के लिए स्थानीय निकायों के साथ समझौता किया है।
क्या है प्रोजेक्ट का प्लान?
इस प्रोजेक्ट के तहत रोजाना 5,000 टन म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट का इस्तेमाल किया जाएगा। कंपनी की रणनीति केंद्र सरकार की 'GOBARdhan' योजना को सपोर्ट करने की है। शहरों के हिसाब से क्षमता का बंटवारा कुछ इस तरह है:
- गुरुग्राम: 2,000 TPD
- फरीदाबाद: 1,600 TPD
- अंबाला: 900 TPD
- हिसार: 500 TPD
इस कचरे से कंपनी रोजाना 70 से 75 टन कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) तैयार करेगी। इसके अलावा, जो सूखा कचरा रिसाइकिल नहीं हो पाएगा, उससे 50 मेगावाट ग्रीन इलेक्ट्रिसिटी बनाई जाएगी।
निवेशकों के लिए चेतावनी
यह कदम भले ही कंपनी के पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करने वाला हो, लेकिन कचरे से ऊर्जा बनाने वाले प्रोजेक्ट्स में कई चुनौतियां होती हैं। भारत में अक्सर कचरे के सोर्स पर ही उसका सही अलगाव (segregation) न होना एक बड़ी समस्या रही है। अगर कचरे की क्वालिटी खराब हुई, तो बायोगैस और बिजली उत्पादन की क्षमता पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, लंबे समय में प्रोजेक्ट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी बायोगैस और बिजली को कितनी बेहतर कीमतों पर बेच पाती है (off-take agreements)। सरकारी पॉलिसी में बदलाव और निर्माण कार्य में देरी जैसी जोखिमों पर निवेशकों को नजर रखनी होगी।
