Oil India Share Price: रिकॉर्ड मुनाफे से मालामाल हुई कंपनी, शेयर **6%** उछला

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Oil India Share Price: रिकॉर्ड मुनाफे से मालामाल हुई कंपनी, शेयर **6%** उछला

Oil India के शेयरों में आज **6%** से ज़्यादा की तेज़ी देखी गई। कंपनी ने पहली तिमाही में **₹2,870 करोड़** का रिकॉर्ड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले **253%** ज़्यादा है। कंपनी का रेवेन्यू भी **59%** बढ़कर **₹7,958 करोड़** रहा, जिसकी मुख्य वजह कच्चे तेल की बढ़ी कीमतें रहीं।

रिकॉर्ड मुनाफे पर Oil India

मंगलवार को Oil India के शेयरों में 6% से ज़्यादा की तेज़ी आई और यह ₹483.95 के इंट्राडे हाई पर पहुँच गया। इस उछाल की वजह कंपनी के जून 2026 को खत्म होने वाली पहली तिमाही के नतीजे रहे। सरकारी तेल कंपनी ने पहली तिमाही में अब तक का सबसे बड़ा प्रॉफिट दर्ज किया है।

कंपनी की कमाई और लागत

कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 253% बढ़कर ₹2,870 करोड़ पर पहुँच गया। वहीं, ऑपरेशन्स से होने वाली कमाई 59% बढ़कर ₹7,958 करोड़ रही। इस शानदार प्रदर्शन की वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी रही, जिससे कंपनी को प्रति बैरल औसतन $98.7 का दाम मिला।

ब्रोकरेज की राय और भविष्य की योजनाएं

मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal) ने इस स्टॉक पर 'न्यूट्रल' रेटिंग बनाए रखी है और टारगेट प्राइस ₹485 रखा है। कंपनी की ग्रोथ स्ट्रेटेजी की बात करें तो, Oil India साल 2027 तक 100 नए कुएं खोदने की योजना बना रही है। इसके अलावा, कंपनी की सब्सिडियरी नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (Numaligarh Refinery Limited) साल 2028 के अंत तक अपनी क्षमता का 75% इस्तेमाल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

सामने क्या हैं चुनौतियां?

मजबूत ऑपरेशनल परफॉरमेंस के बावजूद, कंपनी के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं जिन पर निवेशकों की नज़र है। कंपनी ने रॉयल्टी पर GST भुगतान के लिए ₹5,043 करोड़ का भारी प्रोविज़न किया है, जिससे रेगुलेटरी अनिश्चितता बढ़ गई है। इसके अलावा, बड़े एक्सपैंशन प्रोजेक्ट्स के लिए लिए गए कर्ज की वजह से फाइनेंस कॉस्ट में पिछले साल के मुकाबले 61% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी ने ज़रूरी इंडिपेंडेंट और महिला डायरेक्टर्स की नियुक्ति में नियमों का पालन न करने को लेकर गवर्नेंस कंसर्न भी उठाए हैं।

आगे चलकर, निवेशकों को कंपनी की बढ़ते कर्ज और फाइनेंस कॉस्ट को मैनेज करने की क्षमता पर ध्यान देना होगा। साथ ही, टैक्स पेमेंट से जुड़े रेगुलेटरी मुद्दों के हल होने की प्रगति पर भी नज़र रखनी होगी। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी कंपनी के भविष्य के मुनाफे को प्रभावित करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.